APPCB का बड़ा एक्शन
आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (APPCB) ने ONGC को Well Mori#05 पर प्रोडक्शन रोकने का आदेश जारी किया है। बोर्ड का आरोप है कि यह कुआं ज़रूरी मंजूरी के बिना चलाया जा रहा था और इससे वायु प्रदूषण भी हो रहा था। ONGC को यह आदेश 23 अप्रैल, 2026 को मिला है।
हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि Well Mori#05 अप्रैल 2009 से ही प्रोडक्शन में नहीं है। इसका मतलब है कि बोर्ड के इस नए आदेश से कंपनी के मौजूदा ऑपरेशन्स पर फिलहाल कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। ONGC इस आदेश की बारीकी से समीक्षा कर रही है और जल्द ही अपना जवाब देगी।
क्यों अहम है यह मामला?
यह घटना भारत में एनर्जी कंपनियों पर बढ़ते पर्यावरण नियमों के दबाव को दिखाती है। ONGC जैसी सरकारी कंपनी के लिए, ऐसे आदेश न केवल उसकी प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं, बल्कि भविष्य में और कड़ी जांच का संकेत भी देते हैं।
ONGC के पुराने पर्यावरण मुद्दे
यह पहली बार नहीं है जब ONGC को आंध्र प्रदेश में पर्यावरण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
- अप्रैल 2021 में, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की एक कमेटी ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में ONGC द्वारा जमीन और पानी को प्रदूषित करने और अनियंत्रित उत्सर्जन से वायु प्रदूषण फैलाने जैसे उल्लंघनों का ज़िक्र किया था।
- जुलाई 2025 में, ONGC को राज्य की तीन सुविधाओं पर एफ्लुएंट डिस्चार्ज मानकों का पालन न करने के लिए APPCB को ₹1 करोड़ का पर्यावरण मुआवजा देना पड़ा था।
- इसके अलावा, अगस्त 2022 में, NGT ने ONGC को इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैलाने के लिए APPCB को ₹22.77 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया था।
Well Mori-5 में ही 5 जनवरी, 2026 को एक बड़ा ब्लोआउट और आग लगने की घटना भी हुई थी, जिसे ONGC ने 10 जनवरी, 2026 तक सफलतापूर्वक नियंत्रित कर लिया था।
आगे क्या देखना होगा?
शेयरधारक ONGC की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करेंगे, जिसमें कानूनी और पर्यावरण संबंधी उपायों की योजना शामिल होगी। कंपनी को अपने सभी ऑपरेशन्स में, खासकर आंध्र प्रदेश जैसे संवेदनशील इलाकों में, पर्यावरण मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करना होगा।
