शेयर होल्डर्स का भरोसा, एनर्जी सेक्टर में बड़ा कदम
Lexora Global Limited के शेयर होल्डर्स ने 2 मई, 2026 को हुई एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में कंपनी के स्ट्रैटेजिक डायरेक्शन पर मुहर लगा दी। पेश किए गए सभी सात प्रस्तावों को 99.99996% से ज्यादा वोट मिले, जो मैनेजमेंट के लिए एक बड़ा बूस्ट है।
इन मंजूरी से Lexora Global को अपने ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल को ₹10 करोड़ से बढ़ाकर ₹40 करोड़ करने, बरोइंग पावर्स बढ़ाने और स्टैंडर्ड लिमिट से आगे जाकर इन्वेस्टमेंट, लोन देने और गारंटी इश्यू करने की ताकत मिलेगी। सबसे अहम, कंपनी अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में बदलाव करेगी और 1:10 का स्टॉक स्प्लिट करेगी, जिसमें हर शेयर की फेस वैल्यू ₹10 से घटकर ₹1 हो जाएगी।
शेयर होल्डर्स का यह भारी समर्थन कंपनी के एनर्जी और पावर जनरेशन सेक्टर में बदलाव की मंशा में उनके मजबूत भरोसे को दिखाता है। माना जा रहा है कि कैपिटल और बरोइंग में यह बढ़ोतरी कंपनी के एक्सपेंशन प्लान और ऑपरेशनल रिवाइवल के लिए फंड जुटाने में अहम होगी। वहीं, स्टॉक स्प्लिट का मकसद शेयर्स को ज्यादा से ज्यादा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए अफोर्डेबल बनाना है, जिससे मार्केट लिक्विडिटी भी बढ़ेगी।
गौरतलब है कि Lexora Global Limited, जिसका नाम 1 अप्रैल, 2026 से Yash Trading & Finance Ltd से बदला है, एनर्जी और पावर सेक्टर (रिन्यूएबल्स सहित) में एक बड़ी स्ट्रैटेजिक पिवट पर है। भले ही कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड लिमिटेड ऑपरेशंस और नेट लॉस का रहा है, पर इसकी सब्सिडियरी ने हाल ही में सोलर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट पर फोकस किया है।
EGM से पहले, बोर्ड ने 4 अप्रैल, 2026 को ही ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल बढ़ाने और 10-फॉर-1 स्टॉक स्प्लिट को मंजूरी दे दी थी। EGM के प्रस्तावों ने इन प्लान्स को फॉर्मल कर दिया और कंपनी एक्ट, 2013 के सेक्शन 180(1)(c) के तहत बरोइंग पावर्स को भी बढ़ाया, जिसके लिए शेयर होल्डर की सहमति जरूरी होती है।
हालांकि, शेयर होल्डर की मंजूरी के बावजूद, निवेशकों को कुछ रिस्क पर भी नजर रखनी होगी। Lexora Global का इतिहास नेट लॉस, लो प्रमोटर शेयरहोल्डिंग और नेगेटिव ROE/ROCE का रहा है। कंपनी की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी भी कम मानी जाती है, जिसका अंदाजा इसके 0 के Altman Z स्कोर से लगाया जा सकता है। पुराने रेगुलेटरी इश्यूज, जैसे SEBI की पेनाल्टी और प्रमोटर डीलिंग्स की जांच, गवर्नेंस कंसर्न्स को बढ़ाते हैं।
Lexora Global की कैपिटल बढ़ाने की स्ट्रेटेजी Himalaya Food International जैसी कंपनियों के जैसी ही है, जिसने 2 मई, 2026 को ही EGM में कैपिटल बढ़ाई थी। इसी तरह, 2026 की शुरुआत में V2 Retail Ltd और Manbro Industries Ltd जैसे साथियों ने भी 10:1 का स्टॉक स्प्लिट किया था।
आगे चलकर, निवेशक कंपनी के पावर सेक्टर पिवट को फंड करने के लिए कैपिटल-रेज़िंग प्लान्स के एग्जीक्यूशन पर नजर रखेंगे, साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस और फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर भी। मुख्य इंडिकेटर्स में फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार, नए बरोइंग लिमिट्स का इस्तेमाल और स्टॉक स्प्लिट पर मार्केट की प्रतिक्रिया शामिल होगी।
