Jaiprakash Power Ventures Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 16 मई, 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक में Amelia (North) और Bandha North कोयला खदानों को सरेंडर करने का फैसला किया है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी कोयला नीतियों में हो रहे बदलावों और आर्थिक व्यवहार्यता (economic viability) को देखते हुए कंपनी की लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी (long-term sustainability) और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) को बेहतर बनाना है।
Amelia (North) खदान में ₹222.16 करोड़ के एसेट्स शामिल हैं, जिनमें टेंजिबल (tangible) और इनटैंगिबल (intangible) माइनिंग राइट्स (mining rights) शामिल हैं। वहीं, Bandha North खदान का इन्वेस्टमेंट वैल्यू ₹92.52 करोड़ था और यह अप्रूवल स्टेज (approval stage) में थी। इस तरह, इन दोनों खदानों से जुड़े कुल ₹314.68 करोड़ के एसेट्स प्रभावित होंगे।
यह निर्णय, खासकर Amelia (North) जैसी कैप्चव (captive) खदान को सरेंडर करना, जो कि कंपनी के निगरी थर्मल प्लांट (Nigrie thermal plant) के लिए कोयले की आपूर्ति करती है, Jaiprakash Power Ventures के लिए एक स्ट्रेटेजिक शिफ्ट (strategic shift) का संकेत देता है। कंपनी का मानना है कि वर्तमान रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (regulatory framework) के तहत माइनिंग ऑपरेशंस (mining operations) जारी रखने से वित्तीय दबाव (financial stress) बढ़ सकता है और अपेक्षित रिटर्न (expected returns) निवेश के बराबर नहीं मिल पाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 मार्च, 2026 तक Jaiprakash Power Ventures Ltd का नेट वर्थ (net worth) ₹12,721 करोड़ था। यह कदम कंपनी को कोयला नीतियों की अनिश्चितताओं और आर्थिक जोखिमों को कम करने में मदद करेगा।
इंडस्ट्री (Industry) में भी ऐसे बदलाव देखे जा रहे हैं। JSW Energy जैसी कंपनियां रिन्यूएबल्स (renewables) में निवेश बढ़ा रही हैं, वहीं NTPC जैसी बड़ी पावर जनरेटर कंपनियां कोयले की सप्लाई के लिए लिंकेज (linkages) पर ज्यादा निर्भर करती हैं, जिससे उन्हें ईंधन की आपूर्ति में स्थिरता मिलती है।
अब कंपनी को लेंडर्स (lenders) से आवश्यक अप्रूवल (approvals) लेने होंगे और संबंधित अधिकारियों के साथ सभी फॉर्मल सरेंडर प्रोसीजर्स (formal surrender procedures) को पूरा करना होगा।