कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और इसके मायने
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश DISCOMs की उस अपील को ठुकरा दिया है जिसमें वे JSW Neo Energy Limited द्वारा काटे जा रहे जनरेशन बेस्ड इंसेटिव (GBI) पर सवाल उठा रहे थे। इस ऐतिहासिक फैसले ने यह साफ कर दिया है कि GBI का भुगतान एनर्जी टैरिफ के ऊपर ही किया जाएगा, न कि उसमें से काटकर। यह JSW Energy की सब्सिडियरी के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है और 30 सितंबर, 2023 के एक शुरुआती खुलासे के बाद से चले आ रहे कानूनी विवादों का अंत करती है।
यह फैसला क्यों है खास?
यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय JSW Neo Energy और उसके रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए न केवल बड़ी स्पष्टता लेकर आया है, बल्कि वित्तीय निश्चितता भी प्रदान करता है। यह कंपनी के GBI प्राप्त करने के अधिकार को कानूनी मान्यता देता है, जो कि रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए एक परफॉर्मेंस-आधारित इंसेंटिव है। इस लंबे विवाद के निपटारे से JSW Energy के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ समाप्त हो गया है, जिससे भविष्य के रेवेन्यू की अनुमानित गणना और बेहतर वित्तीय योजना बनाने में मदद मिलेगी।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला 28 जुलाई, 2018 को आंध्र प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (APERC) के एक आदेश से शुरू हुआ था। इस आदेश ने AP DISCOMs को पावर जनरेटिंग कंपनियों को GBI का भुगतान करते समय कटौती करने की अनुमति दी थी। हालांकि, मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (MNRE) द्वारा शुरू की गई GBI स्कीम का मुख्य उद्देश्य पवन ऊर्जा उत्पादकों के लिए एक प्रोत्साहन (incentive) के रूप में था, जिसे रेगुलेटर्स द्वारा निर्धारित टैरिफ के अतिरिक्त प्रदान किया जाना था। JSW Neo Energy, जो इंडियन विंड पावर एसोसिएशन की सदस्य भी है, ने APERC के आदेश का विरोध किया। इससे पहले, अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) ने विंड पावर डेवलपर्स के पक्ष में फैसला सुनाया था, APERC के आदेश को रद्द कर दिया था और काटी गई GBI राशि को ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया था। इसी के खिलाफ आंध्र प्रदेश DISCOMs ने APTEL के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके नतीजे में आज यह फैसला आया है।