एनर्जी स्टोरेज में IndiGrid का बड़ा दांव
IndiGrid Infrastructure Trust ने ₹573 करोड़ के एंटरप्राइज वैल्यू (Enterprise Value) पर Gujarat BESS Private Limited का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। इस कदम से कंपनी के ऑपरेशनल एसेट्स (Operational Assets) में एक महत्वपूर्ण बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट जुड़ गया है।
स्ट्रेटेजिक एक्सपेंशन (Strategic Expansion) और BOO मॉडल
यह एक्विजिशन (Acquisition) IndiGrid के लिए एक बड़ा विविधीकरण (Diversification) है, जो इसे पारंपरिक पावर ट्रांसमिशन से आगे बढ़कर एनर्जी स्टोरेज जैसे अहम क्षेत्र में ले जा रहा है। BESS को शामिल करके, IndiGrid ग्रिड की स्थिरता को बढ़ाना चाहती है और रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स (Renewable Energy Source) को इंटीग्रेट करने में मदद करना चाहती है, जो अक्सर इंटरमिटेंसी (Intermittency) से जूझते हैं। यह प्रोजेक्ट बिल्ड ओन ऑपरेट (BOO) मॉडल के तहत काम करेगा, जिसका मतलब है कि IndiGrid सीधे इसके ऑपरेशन्स को संभालेगी, जो रेवेन्यू-जेनरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को ओन और मैनेज करने की इसकी स्ट्रेटेजी (Strategy) के अनुरूप है।
प्रोजेक्ट की डिटेल्स और रेवेन्यू
इस नए BESS प्रोजेक्ट से इसके 12 साल के कंसेशन पीरियड (Concession Period) के दौरान सालाना ₹97 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू (Revenue) मिलने की उम्मीद है। IndiGrid ने यह प्रोजेक्ट मार्च 2024 में गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL) से टैरिफ-बेस्ड कम्पटीटिव बिडिंग (Tariff-Based Competitive Bidding) के जरिए हासिल किया था।
IndiGrid का ग्रोथ ट्रैक रिकॉर्ड (Growth Track Record)
2016 में स्थापित, IndiGrid भारत का सबसे बड़ा पावर सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (Infrastructure Investment Trust) है। यह कंपनी कम-जोखिम वाले, लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्टेड प्रोजेक्ट्स को एक्वायर (Acquire) और मैनेज करने के लिए जानी जाती है। BESS प्रोजेक्ट का यह अधिग्रहण हाल ही में गैडाग ट्रांसमिशन लिमिटेड (Gadag Transmission Limited) और मोरेना I SEZ ट्रांसमिशन लिमिटेड (Morena I SEZ Transmission Limited) जैसे प्रोजेक्ट्स की कम्प्लीशन (Completion) के बाद हुआ है। कंपनी नए ग्रीनफील्ड ट्रांसमिशन और BESS प्रोजेक्ट्स को डेवलप करने की योजना भी बना रही है।
इन बातों पर रखें नजर: प्रमुख जोखिम
निवेशकों को यह ध्यान देना चाहिए कि ₹573 करोड़ का अधिग्रहण मूल्य एक अनुमानित आंकड़ा है और अंतिम समझौतों के आधार पर इसमें एडजस्टमेंट (Adjustment) हो सकता है। BOO मॉडल के तहत BESS प्रोजेक्ट्स को ऑपरेट करने में डायरेक्ट मैनेजमेंट की जिम्मेदारियां और जुड़े हुए ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risks) शामिल हैं। इसके अलावा, IndiGrid Investment Managers Ltd ने अप्रैल 2024 में SEBI के साथ एक प्रोब (Probe) सेटल (Settle) किया था, जिसमें उधार लिए गए फंड के दुरुपयोग से संबंधित ₹23.4 लाख का सेटलमेंट चार्ज (Settlement Charge) शामिल था।
कॉम्पिटिशन (Competition) का माहौल
IndiGrid इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट सेक्टर में ऑपरेट करती है, जिसका अप्रत्यक्ष मुकाबला नेशनल हाईवेज इन्फ्रा ट्रस्ट (National Highways Infra Trust) और क्यूब हाईवेज ट्रस्ट (Cube Highways Trust) जैसी रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करने वाली एंटिटीज (Entities) से है। ब्रॉडर पावर इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेस (Broader Power Infrastructure Space) में, प्रमुख कॉम्पिटिटर्स (Competitors) में सरकारी स्वामित्व वाली पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (Power Grid Corporation of India Ltd), इंटीग्रेटेड यूटिलिटी टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (Tata Power Company Ltd), और अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड (Adani Transmission Ltd) जैसी प्राइवेट कंपनियां शामिल हैं।
आगे क्या?
आगे चलकर, निवेशकों का ध्यान अधिग्रहण लागत के फाइनल एडजस्टमेंट (Final Adjustment), प्रोजेक्ट के कमर्शियल ऑपरेशन कमेंट (Commercial Operation Commencement) और वास्तविक रेवेन्यू जनरेशन (Revenue Generation) पर रहेगा। BESS और ट्रांसमिशन में IndiGrid के विस्तार, साथ ही InvITs या एनर्जी स्टोरेज के लिए किसी भी विकसित होते रेगुलेटरी एस्पेक्ट्स (Regulatory Aspects) की निरंतर निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
