इंफ्रा से अब एनर्जी स्टोरेज तक: H.G. Infra का नया कदम
H.G. Infra Engineering Limited ने अपने एक बड़े स्ट्रेटेजिक कदम के तहत, अपनी पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी (wholly-owned subsidiary) H.G. Banaskantha Bess Private Limited में ₹48.52 करोड़ का निवेश किया है। यह बड़ा निवेश राइट्स इश्यू (rights issue) के ज़रिए किया गया है।
BESS सेक्टर में एंट्री का मकसद
इस फंड के ज़रिए कंपनी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के उभरते और तेज़ी से बढ़ते सेक्टर में अपनी पहचान बनाने उतरेगी। यह कंपनी के लिए एक अहम डाइवर्सिफिकेशन (diversification) है, जो इसे कंस्ट्रक्शन (construction) और इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) और एनर्जी स्टोरेज (energy storage) के क्षेत्र में भी ले जाएगा। भारत सरकार का ज़ोर ग्रिड स्टेबिलिटी (grid stability) और रिन्यूएबल एनर्जी को पावर ग्रिड में बेहतर तरीके से इंटीग्रेट (integrate) करने पर है, और BESS इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाता है। H.G. Infra का इस क्षेत्र में उतरना भविष्य की बड़ी संभावनाओं को भुनाने की तैयारी है।
सब्सिडियरी की मौजूदा स्थिति
बता दें कि H.G. Banaskantha Bess Private Limited को हाल ही में 3 दिसंबर, 2024 को इनकॉर्पोरेट (incorporate) किया गया था। 23 मार्च, 2026 तक इसका अधिकृत पूंजी (authorized capital) ₹79.02 लाख और पेड-अप कैपिटल (paid-up capital) ₹15.00 लाख दर्ज किया गया था।
कंपनी का रणनीतिक बदलाव
H.G. Infra Engineering, जो मुख्य रूप से रोड्स (roads), हाईवे (highways), रेलवे (railways) और मेट्रो प्रोजेक्ट्स (metro projects) के निर्माण में माहिर है, पहले ही जून 2024 में सोलर सब्सिडियरीज़ (solar subsidiaries) का अधिग्रहण करके ग्रीन एनर्जी (green energy) की ओर एक रणनीतिक कदम बढ़ा चुकी है।
चुनौतियां और कानूनी पेंच
हालांकि, इस नए वेंचर (venture) में कुछ चुनौतियां और कानूनी पेंच भी जुड़े हुए हैं। H.G. Banaskantha Bess Private Limited अभी शुरुआती दौर में है और 31 मार्च, 2025 तक इसका कोई टर्नओवर (turnover) दर्ज नहीं किया गया था। इसके अलावा, कंपनी और उसकी सब्सिडियरीज़ हाल के दिनों में कुछ जांचों के घेरे में भी रही हैं। जनवरी 2026 में, कंपनी एक CBI जांच का हिस्सा रही थी, और इससे पहले सितंबर 2024 में NHAI द्वारा ₹1 करोड़ का जुर्माना और FY23-24 के लिए इनकम टैक्स (Income Tax) की नोटिस भी जारी हुई थी। अक्टूबर 2025 में TDS (Tax Deducted at Source) में देरी के लिए ₹1.42 करोड़ का टैक्स पेनल्टी (tax penalty) भी लगा था।
प्रतिस्पर्धी बाज़ार
BESS सेक्टर में Tata Power और Adani Green Energy जैसी बड़ी कंपनियां पहले से ही सक्रिय हैं। Sterling and Wilson Renewable Energy और Exide Industries जैसी कंपनियां भी इस स्पेस में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। H.G. Infra का प्रवेश इस बेहद प्रतिस्पर्धी (competitive) बाजार में होगा, जहां भारी निवेश और सरकारी नीतियां इसे आगे बढ़ा सकती हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को अब H.G. Banaskantha Bess Private Limited के स्पेसिफिक प्रोजेक्ट्स (specific projects), कमर्शियल ऑपरेशंस (commercial operations) शुरू होने की टाइमलाइन (timeline), और भविष्य में कैपिटल एलोकेशन (capital allocation) प्लान्स पर बारीकी से नज़र रखनी होगी।