Godawari Power and Ispat Ltd (GPIL) ने अपने महत्वपूर्ण बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट के लिए ₹150.17 करोड़ की राशि का इस्तेमाल किया है। यह कंपनी की ₹500 करोड़ की प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के जरिए जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा है। CARE Ratings की एक रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है, लेकिन इस पर एक सवाल भी उठाती है कि क्या यह फंड सीधे तौर पर सब्सिडियरी (Subsidiary) से जुड़ा है।
CARE Ratings की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही तक ₹150.17 करोड़ का उपयोग किया जा चुका था। इसमें से ₹75.60 करोड़ सब्सिडियरी Godawari New Energy Private Limited (GNEPL) में BESS प्रोजेक्ट के लिए निवेश किए गए। इसके अलावा, ₹25.22 करोड़ GNEPL के माध्यम से जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) के लिए आवंटित किए गए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केवल ₹0.05 करोड़ की राशि अप्रयुक्त (Unutilized) बची है, जो फंड के लगभग पूरे इस्तेमाल का संकेत देता है।
कंपनी का यह कदम रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) सेक्टर में उसके विस्तार को दर्शाता है। नए सिरे से बनाई गई योजनाओं को लागू करने के लिए फंड का सफलतापूर्वक उपयोग महत्वपूर्ण है। लेकिन, CARE Ratings की यह चिंता कि फंड सीधे GNEPL से कितना जुड़ा है, पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। भविष्य में वारंट कंसीडरेशन (Warrant Consideration) की अनिश्चितता भी एक चिंता का विषय है।
Godawari Power and Ispat Ltd मुख्य रूप से एक इंटीग्रेटेड स्टील मैन्युफैक्चरर (Integrated Steel Manufacturer) और पावर प्रोड्यूसर (Power Producer) है। कंपनी ने अक्टूबर 2025 में बोर्ड की मंजूरी से ₹500 करोड़ तक जुटाने के लिए प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी दी थी। इन फंड्स का मकसद GNEPL के माध्यम से BESS प्रोजेक्ट और संभावित कर्ज (Debt) कम करना था। यह रणनीतिक कदम GPIL को बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज मार्केट का फायदा उठाने और अपने मुख्य स्टील कारोबार पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
BESS प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन (Implementation) में प्रगति की पुष्टि हो गई है, जो GPIL के रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप है। निवेशकों का ध्यान अब सब्सिडियरी को आवंटित फंड की पारदर्शिता और ट्रेसेबिलिटी (Traceability) पर है। कंपनी पर दबाव है कि वह प्रेफरेंशियल इश्यू के किसी भी भविष्य के ट्रेंच (Tranche) के लिए फंड के प्रवाह को स्पष्ट रूप से परिभाषित करे। BESS प्रोजेक्ट के लिए भविष्य का पूंजी निवेश (Capital Infusion) बाहरी कारकों और वारंट होल्डर्स के फैसलों पर निर्भर करेगा।
CARE Ratings ने नोट किया कि GPIL के करंट अकाउंट (Current Account) में कई इनफ्लो (Inflows) और आउटफ्लो (Outflows) के कारण तिमाही के लिए GNEPL में निवेश किए गए फंड का सीधा जुड़ाव निर्णायक रूप से स्थापित नहीं किया जा सका। इसके अलावा, शेष 75% वारंट कंसीडरेशन की समय पर प्राप्ति कंपनी के ऑपरेटिंग परफॉरमेंस, बाजार की स्थितियों, नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) और वारंट होल्डर्स की वित्तीय लचीलेपन पर निर्भर करती है।
ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) क्षेत्र में अन्य प्रमुख कंपनियां जैसे Tata Power और JSW Energy भी रिन्यूएबल एनर्जी और BESS प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रही हैं।
मुख्य प्रोजेक्ट मेट्रिक्स:
- कुल प्रेफरेंशियल इश्यू साइज: ₹500.00 करोड़ (FY26–FY27)।
- कुल फंड उपयोग (31 मार्च 2026 तक): ₹150.17 करोड़ (Q4 FY26)।
- अप्रयुक्त राशि (31 मार्च 2026 तक): ₹0.05 करोड़ (Q4 FY26)।
आगे क्या?
- फंड उपयोग की प्रगति पर CARE Ratings की अनुवर्ती रिपोर्टें।
- GNEPL BESS प्रोजेक्ट में मील के पत्थर हासिल करना।
- फंड लिंकेज पर GPIL से स्पष्टीकरण।
- शेष वारंट कंसीडरेशन की प्राप्ति की पुष्टि।
- BESS सुविधा की परिचालन क्षमता (Operational Capacity) और कमीशनिंग (Commissioning) पर अपडेट।
