क्यों बंद की गई ट्रेडिंग विंडो?
गेल (इंडिया) लिमिटेड ने यह घोषणा की है कि कंपनी के डेजिग्नेटेड इम्प्लॉइज और उनके रिलेटिव्स (relatives) 1 अप्रैल, 2026 से लेकर पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान कंपनी के शेयर्स (shares) का लेन-देन नहीं कर पाएंगे। यह नियम कंपनी के तिमाही नतीजों (quarterly results) की घोषणा से ठीक पहले लागू होगा।
SEBI का नियम और समय-सीमा
SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के इनसाइडर ट्रेडिंग निषेध (Prohibition of Insider Trading - PIT) रेगुलेशंस के तहत, लिस्टेड कंपनियों के लिए यह एक अनिवार्य प्रक्रिया है। इसके तहत, कंपनी के भीतर की अहम जानकारी, जैसे कि अनपब्लिश्ड प्राइस-सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन (unpublished price-sensitive information) का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए ट्रेडिंग विंडो बंद की जाती है।
इस बार, ट्रेडिंग विंडो पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए बंद रहेगी। इसके अलावा, तिमाही नतीजों की घोषणा से पहले की निश्चित 'ब्लैकआउट पीरियड्स' (blackout periods) भी लागू होंगी। जैसे कि, पहली तिमाही (Q1 FY26-27) के लिए 1 जुलाई, 2026 से, दूसरी तिमाही (Q2 & H1 FY26-27) के लिए 1 अक्टूबर, 2026 से, और तीसरी तिमाही (Q3 & Nine Months FY26-27) के लिए 1 जनवरी, 2027 से। जैसे ही बोर्ड मीटिंग में वित्तीय नतीजे मंजूर हो जाएंगे, उसके 48 घंटे बाद यह ट्रेडिंग विंडो फिर से खोल दी जाएगी।
इनसाइडर्स पर असर
इस क्लोजर के तहत, सभी डेजिग्नेटेड इम्प्लॉइज और उनके करीबी इनसाइडर्स 1 अप्रैल, 2026 से लेकर नतीजों की घोषणा और विंडो के दोबारा खुलने तक गेल के किसी भी सिक्योरिटी (security) में खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे।
कंपनी का पिछला रिकॉर्ड
हालांकि, ट्रेडिंग विंडो का बंद होना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन गेल का पिछला रिकॉर्ड थोड़ा मिलाजुला रहा है। कंपनी को पहले भी स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा बोर्ड कंपोजीशन (board composition) और कमिटी स्ट्रक्चर (committee structure) से जुड़ी अनियमितताओं के लिए जुर्माना भरना पड़ा है। इसके अलावा, गेल को ₹143.08 करोड़ के जीएसटी (GST) पेनल्टी और ₹21.84 लाख की कस्टम्स (customs) पेनल्टी का भी सामना करना पड़ा है।
इंडस्ट्री प्रैक्टिस
गेल का यह कदम इंडस्ट्री के दूसरे बड़े पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) की तरह ही है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) जैसी कंपनियां भी SEBI के दिशानिर्देशों का पालन करने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अपने वित्तीय नतीजों के आसपास इसी तरह के प्रोटोकॉल अपनाती हैं।
