Demand में आई नरमी, Production और Offtake पर असर
यह गिरावट मुख्य रूप से पावर सेक्टर से आती कमजोर मांग (Softening Demand) और रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) स्रोतों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा (Competition) के कारण है। कंपनी के अप्रैल 2026 के आंकड़ों में 9.7% की साल-दर-साल गिरावट के साथ 5.61 करोड़ टन कोयला उत्पादन दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 6.21 करोड़ टन था। वहीं, कोयले की ऑफटेक, यानी कंपनी द्वारा बेचा या खपत किया गया कोयला, भी 2.0% घटकर 6.32 करोड़ टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 6.45 करोड़ टन था।
हालांकि, कंपनी की सहायक कंपनियों (Subsidiaries) का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। उदाहरण के लिए, SECL ने उत्पादन में अच्छी वृद्धि दर्ज की, वहीं BCCL की ऑफटेक में बड़ी गिरावट आई।
दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक और एक 'महारत्न' कंपनी Coal India, भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कंपनी अपनी लॉन्ग-टर्म रणनीति के तहत रिन्यूएबल एनर्जी और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) में विविधता लाने की कोशिश कर रही है।
भारत में कोयले की मांग में लंबी अवधि में औद्योगिक विस्तार के कारण वृद्धि जारी रहने का अनुमान है, लेकिन हालिया रुझान थर्मल पावर प्लांट्स द्वारा खपत में नरमी दिखा रहे हैं। इसका मुख्य कारण रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का तेजी से विस्तार और बिजली की कुल मांग में धीमी वृद्धि है।
यदि यह वॉल्यूम ट्रेंड जारी रहता है, तो कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर दबाव पड़ सकता है। मांग में लगातार गिरावट से खनन क्षमता का कम उपयोग (Underutilization) भी हो सकता है, जिसका असर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और लागत संरचना पर पड़ सकता है।
इस बीच, प्रमुख कंपनियां जैसे NTPC और Adani Power कोयला-आधारित क्षमता का विस्तार कर रही हैं, जो मांग की निरंतरता का संकेत देती हैं, हालांकि वे भी रिन्यूएबल्स द्वारा आकार दिए गए प्रतिस्पर्धी परिदृश्य से जूझ रही हैं। NTPC अपनी ईंधन सुरक्षा के लिए कोयला उत्पादन भी बढ़ा रही है। Singareni Collieries Company Limited (SCCL) भी एक महत्वपूर्ण उत्पादक है।
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, भारत की कोयले की मांग 90.6 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो साल-दर-साल 8 करोड़ टन की वृद्धि है। Coal India ने पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 को रिकॉर्ड कोयला उत्पादन 78.106 करोड़ टन और ऑफटेक 76.298 करोड़ टन के साथ समाप्त किया था।
