यह कदम तब उठाया गया है जब PTC India और उसकी सहायक कंपनियों पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर, PTC India Financial Services (PFS) में चल रहे विवादों के चलते यह बिक्री हुई है।
क्या हैं गवर्नेंस के मुद्दे?
सूत्रों के अनुसार, PFS में कुछ डायरेक्टर्स ने गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के चलते इस्तीफा दे दिया था। इतना ही नहीं, 2024 में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने PFS के CEO और PTC India के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पर खामियों के चलते जुर्माना भी लगाया था। इन बढ़ते गवर्नेंस कंसर्न्स (governance concerns) को कंपनी के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर माना जा रहा है।
BlackRock का कदम क्या कहता है?
BlackRock, जो अपने क्लाइंट्स के लिए फंड मैनेज करता है, ने यह शेयर ओपन मार्केट ट्रांज़ैक्शन (on-market transaction) के जरिए बेचे। बिक्री से पहले, BlackRock के पास PTC India के 3.35% वोटिंग कैपिटल के बराबर 99,16,313 शेयर थे। 8,31,417 शेयर बेचने के बाद, उनकी होल्डिंग घटकर 90,84,896 शेयर यानी 3.07% रह गई।
हालांकि, 0.28% की यह हिस्सेदारी घटाना अपने आप में बड़ा नहीं लगता, लेकिन एक बड़े संस्थागत निवेशक (institutional investor) का यह कदम बाजार में अन्य निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है। ऐसे कदम से अन्य निवेशक भी अपनी होल्डिंग्स पर दोबारा विचार कर सकते हैं, जिससे स्टॉक के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
PTC India कौन है?
PTC India, साल 1999 में स्थापित हुई थी और भारत के पावर ट्रेडिंग सेक्टर में एक अहम खिलाड़ी है। यह ट्रेडिंग, फाइनेंसिंग और रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस (renewable energy solutions) के क्षेत्र में काम करती है। इसके प्रमोटर्स में NTPC और Power Grid Corporation जैसी सरकारी संस्थाएं शामिल हैं। BlackRock की PTC India में हिस्सेदारी बदलती रही है; इसने 2024 में शेयर खरीदे थे और 2025 में भी कुछ हिस्सेदारी घटाई थी।
बाजार की नज़रें अब BlackRock और अन्य संस्थागत निवेशकों की भविष्य की डिस्क्लोजर्स (disclosures) पर होंगी। साथ ही, PTC India से गवर्नेंस चिंताओं को दूर करने के उपायों पर किसी भी आधिकारिक बयान का इंतजार रहेगा।
