BPCL का Petronet LNG के साथ ₹8,438 करोड़ का सौदा: शेयरहोल्डर्स की मंजूरी क्यों जरूरी?
BPCL ने Petronet LNG के साथ फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए कोच्चि और दहेज स्थित टर्मिनलों से ₹8,438.61 करोड़ की लागत से Regasified Liquefied Natural Gas (RLNG) और अन्य सेवाएं खरीदने का प्रस्ताव रखा है। SEBI के नियमों के मुताबिक, यह डील मैटेरियल रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन (RPT) की ₹5,000 करोड़ की सीमा को पार करती है, इसलिए कंपनी को शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेनी अनिवार्य है।
यह सौदा BPCL के लिए अगले फाइनेंशियल ईयर में RLNG की सप्लाई सुनिश्चित करने की दृष्टि से बेहद अहम है। इतनी बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन के लिए शेयरधारकों की मंजूरी कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए जरूरी है।
BPCL, जो भारत के एनर्जी सेक्टर की एक प्रमुख कंपनी है, Petronet LNG की प्रमोटर भी है और 12.50% की हिस्सेदारी रखती है। इस रिश्ते के चलते Petronet LNG, BPCL की एसोसिएट और एक रिलेटेड पार्टी मानी जाती है। Petronet LNG के दहेज और कोच्चि स्थित टर्मिनल देश के नेचुरल गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण हैं। SEBI के LODR रेगुलेशन के तहत ₹5,000 करोड़ से ऊपर के RPTs के लिए शेयरहोल्डर अप्रूवल की जरूरत होती है। BPCL और Petronet LNG के बीच पहले भी बड़े ट्रांजैक्शन हुए हैं, जो ₹7,000 करोड़ से अधिक के रहे हैं।
शेयरहोल्डर्स इस सौदे पर 30 मार्च से 28 अप्रैल, 2026 तक पोस्टल बैलेट (ई-वोटिंग) के जरिए वोट कर सकेंगे। इस वोटिंग के नतीजे 30 अप्रैल, 2026 तक आने की उम्मीद है। इस मंजूरी से BPCL Petronet LNG से FY2026-27 के लिए RLNG और सेवाओं की खरीद आधिकारिक तौर पर कर सकेगी।
अगर शेयरहोल्डर इस सौदे को मंजूरी नहीं देते हैं, तो BPCL को सप्लाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ सकती हैं, जिससे उसके ऑपरेशंस प्रभावित हो सकते हैं। बड़े रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन हमेशा निवेशकों और रेगुलेटर्स की नजर में रहते हैं कि वे निष्पक्ष और व्यावसायिक रूप से समझदारी भरे हों।
प्रस्ताविक ट्रांजैक्शन की वैल्यू ₹8,438.61 करोड़ है, जो SEBI की ₹5,000 करोड़ की सीमा से अधिक है। तुलना के लिए, BPCL ने FY2024-25 में ₹7,462.20 करोड़ की खरीद की थी, और अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान यह आंकड़ा ₹5,573.71 करोड़ रहा था।
BPCL एनर्जी मार्केट में Indian Oil Corporation (IOCL), Hindustan Petroleum Corporation Ltd (HPCL) और Reliance Industries Ltd (RIL) जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है, जो अपने एनर्जी सप्लाई चेन और प्रोक्योरमेंट को मैनेज करती हैं।
