डील में क्यों हुई देरी?
Aurobindo Pharma ने अपने एक अहम सौदे को पूरा करने की समय-सीमा बढ़ा दी है। कंपनी Swarnaakshu Solar Power Private Limited में 26% तक की हिस्सेदारी खरीदने जा रही थी, लेकिन अब इसके लिए 30 जून, 2026 तक का समय मिलेगा। यह एक्सटेंशन (extension) मुख्य रूप से सोलर प्लांट के लिए ज़रूरी राज्य सरकार की मंज़ूरियों (approvals) में हो रही देरी की वजह से है।
क्या हैं नए अपडेट्स?
यह डील, जिसमें एक कैप्टिव सोलर पावर परचेज एग्रीमेंट (captive solar power purchase agreement) भी जुड़ा है, पहले 31 मार्च, 2026 तक पूरी होनी थी। लेकिन, अब नई डेडलाइन 30 जून, 2026 कर दी गई है।
ESG और रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस
यह कदम Aurobindo Pharma के एनवायर्नमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ESG) लक्ष्यों के साथ पूरी तरह मेल खाता है। कंपनी अपनी रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) के इस्तेमाल को बढ़ाना चाहती है। कैप्टिव सोलर पावर (captive solar power) हासिल करने से कंपनी को लंबे समय में ऑपरेशनल कॉस्ट (operational cost) में बचत होगी और सस्टेनेबिलिटी (sustainability) रिपोर्टिंग भी मजबूत होगी। यह फार्मा सेक्टर (pharma sector) में बढ़ते ट्रेंड को भी दर्शाता है, जहां कंपनियां एनर्जी स्ट्रैटेजी (energy strategy) को मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) और ऑपरेशनल प्लानिंग (operational planning) में शामिल कर रही हैं।
प्रोजेक्ट का बैकग्राउंड
Aurobindo Pharma पहले से ही रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश करती रही है। कंपनी आंध्र प्रदेश में अपना 30 MW का सोलर प्लांट चला रही है। फिलहाल Telangana में 30 MW AC (40 MW DC) का नया सोलर प्लांट लगाने की योजना है, जिसमें करीब ₹10.40 करोड़ का निवेश किया जाएगा। Swarnaakshu Solar Power Private Limited की शुरुआत फरवरी 2025 में हुई थी।
आगे क्या?
इस डील को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ा रिस्क (risk) राज्य सरकार की मंज़ूरियों का है, जिसमें और भी देरी हो सकती है। हालांकि, यह एक्सटेंशन कंपनी के US FDA से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) मुद्दों से अलग है। भारतीय फार्मा सेक्टर में यह एक आम ट्रेंड बनता जा रहा है, जहां Cipla जैसी कंपनियां भी बड़े कैप्टिव सोलर पावर प्रोजेक्ट्स (captive solar power projects) में निवेश कर रही हैं।
