ACME Solar का राजस्थान BESS प्रोजेक्ट: चौथे फेज की शुरुआत, कुल क्षमता पहुंची 133 MW
ACME Solar Holdings Limited ने घोषणा की है कि राजस्थान में उनके बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट का चौथा फेज 3 अप्रैल, 2026 तक कमर्शियल ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाएगा। इस नए फेज में 33.333 MW क्षमता और 160.48 MWh स्टोरेज कैपेसिटी जोड़ी जाएगी। इसके चालू होने पर, प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 133.336 MW और 641.980 MWh तक पहुंच जाएगी। यह साइट के लिए नियोजित कुल 300 MW / 1409.34 MWh BESS क्षमता का लगभग 44% है। यह कदम कंपनी के महत्वपूर्ण एनर्जी स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में लगातार प्रगति को दर्शाता है।
यह क्यों मायने रखता है?
भारत के रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ते कदम में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये सिस्टम अतिरिक्त सौर और पवन ऊर्जा को स्टोर करके और पीक डिमांड के समय या कम उत्पादन के दौरान इसे जारी करके ग्रिड को स्थिर करने में मदद करते हैं। इस बढ़ी हुई स्टोरेज कैपेसिटी से रिन्यूएबल एनर्जी की सप्लाई ज्यादा भरोसेमंद बनेगी, जिससे फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम होगी और ग्रिड की ओवरऑल स्टेबिलिटी सुधरेगी।
ACME की बड़ी एनर्जी स्टोरेज रणनीति
ACME Solar भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में एक अहम खिलाड़ी है। कंपनी सोलर, विंड और तेजी से बढ़ते BESS और फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) प्रोजेक्ट्स जैसे इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस पर फोकस कर रही है। ACME का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2030 तक 10 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी हासिल करना है। राजस्थान प्रोजेक्ट, BESS विस्तार योजना का हिस्सा है, जिसके तहत ACME विभिन्न राज्यों में लगभग 17 GWh BESS इंस्टॉलेशन का लक्ष्य रखती है। कंपनी ने पहले भी BESS के अन्य फेज चालू किए हैं और NHPC के लिए 275 MW/550 MWh का BESPA जैसे एग्रीमेंट हासिल किए हैं। इन BESS एसेट्स को शुरू में मर्चेंट बेसिस पर ऑपरेट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे पीक और नॉन-पीक घंटों के बीच मूल्य अंतर का फायदा उठाया जा सके, इससे पहले कि उन्हें लॉन्ग-टर्म PPAs के तहत FDRE प्रोजेक्ट्स के साथ इंटीग्रेट किया जाए।
विस्तार का प्रभाव
आगामी कमिशनिंग के साथ, शेयरधारक ACME Solar की ऑपरेशनल BESS कैपेसिटी में वृद्धि देखेंगे, जिससे प्रोजेक्ट अपने अंतिम लक्ष्य के करीब पहुंचेगा। यह विस्तार तेजी से बढ़ते एनर्जी स्टोरेज मार्केट में ACME Solar की स्थिति को मजबूत करता है। कंपनी ग्रिड इंटरमिटेंसी को मैनेज करने और फर्म पावर सॉल्यूशंस ऑफर करने के लिए बेहतर स्थिति में होगी।
मुख्य जोखिम और चुनौतियाँ
ACME Solar को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी को लगभग ₹149.73 करोड़ का GST डिमांड नोटिस मिला है, जिसका वे विरोध करेंगे, हालांकि इसका कोई तत्काल व्यावसायिक प्रभाव अपेक्षित नहीं है। इसके अलावा, ACME के 1200 MW सोलर प्रोजेक्ट्स और ट्रांसमिशन लाइन से संबंधित सुप्रीम कोर्ट में एक मामला चल रहा है। यह केस ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के आवास संबंधी चिंताओं के कारण ओवरहेड लाइनों पर एक समिति के फैसले को चुनौती देता है, जो संभावित रूप से पावर जनरेशन में बाधा डाल सकता है। वित्तीय मोर्चे पर, ACME Solar हाई लीवरेज के साथ काम करती है; मार्च 2026 तक इसका डेट टू EBITDA रेशियो 6.00 गुना और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) 8.52% था। इसके वैल्यूएशन और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की हिस्सेदारी में कमी को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं।
कंपटीटिव लैंडस्केप
ACME Solar तेजी से बढ़ते BESS सेक्टर में काम कर रही है। प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में Tata Power शामिल है, जो मुंबई में अपने 100 MW सोलर + 120 MWh BESS जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ BESS को अपनी रणनीति में इंटीग्रेट कर रही है। JSW Energy 2030 तक बड़ी स्टोरेज कैपेसिटी की योजना बना रही है और पहले से ही 1.0 GWh BESS प्रोजेक्ट का निर्माण कर रही है। Vikram Solar भी BESS मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटीज में भारी निवेश कर रहा है।
फाइनेंशियल स्नैपशॉट
मार्च 2026 को समाप्त छह महीनों के लिए ACME Solar का रेवेन्यू 58.49% बढ़कर ₹964.54 करोड़ हो गया, और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 68.07% बढ़कर ₹225.65 करोड़ हो गया। हालांकि, मार्च 2026 तक कंपनी का डेट टू EBITDA रेशियो 6.00 गुना था, और इसी अवधि के लिए इसका ROCE 8.52% था।
निवेशक आउटलुक
निवेशक राजस्थान BESS प्रोजेक्ट के पूर्ण कमिशनिंग और इसके रेवेन्यू पर प्रभाव पर बारीकी से नजर रखेंगे। डेट में कमी और ROCE जैसे वित्तीय मैट्रिक्स में सुधार भविष्य में महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। GST डिमांड नोटिस और ट्रांसमिशन लाइनों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट केस के नतीजे भी ट्रैक करने के लिए अहम हैं। ACME की समग्र BESS और FDRE प्रोजेक्ट पाइपलाइन के एग्जीक्यूशन में सफलता पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।
