नतीजों का पूरा विश्लेषण:
अगर हम फाइनेंशियल ईयर 2026 की बात करें, तो UBL का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट 9.92% घटकर ₹413.39 करोड़ रहा, जबकि टोटल इनकम 9.96% गिरकर ₹17,508.66 करोड़ तक पहुंच गई। वहीं, चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे थोड़े बेहतर दिखे, जहां टोटल इनकम में मामूली 0.42% की गिरावट के बावजूद, कंसोलिडेटेड प्रॉफिट 4.20% बढ़कर ₹101.87 करोड़ दर्ज किया गया।
बड़ी चुनौतियाँ: CCI का जुर्माना और बढ़ता कर्ज
कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा 2021 में लगाए गए ₹751.83 करोड़ के भारी जुर्माने का मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी है, लेकिन इसका अंतिम फैसला कंपनी की बैलेंस शीट पर बड़ा असर डाल सकता है। यह एक बड़ी कंटिंजेंट लायबिलिटी (Contingent Liability) है।
चिंता का दूसरा बड़ा कारण कंपनी पर बढ़ता कर्ज है। 31 मार्च 2026 तक, स्टैंडअलोन करंट बोरिंग्स (Current Borrowings) पिछले साल के ₹574.85 करोड़ से दोगुना से भी ज्यादा होकर ₹1,175.26 करोड़ पर पहुंच गई हैं। इससे कंपनी पर ब्याज का बोझ बढ़ेगा और फाइनेंशियल लीवरेज (Financial Leverage) भी बढ़ेगा।
इसके अलावा, बिहार में शराबबंदी नीति के कारण मई 2022 से बंद पड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का असर भी कंपनी की प्रोडक्शन कैपेसिटी पर पड़ रहा है।
आगे क्या?
कंपनी के बोर्ड ने FY26 के लिए ₹10 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) रिकमेंड किया है। निवेशकों की नज़रें CCI जुर्माने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले, रेवेन्यू में आई गिरावट को रोकने की रणनीति और बढ़ते कर्ज को मैनेज करने के कंपनी के प्लान पर रहेंगी।
