Q4 और पूरे साल में थंगामयिल ज्वैलरी का दमदार प्रदर्शन
कंपनी ने 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई चौथी तिमाही (Q4 FY26) के लिए शानदार नतीजे जारी किए हैं। इस तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 105.63% बढ़कर ₹2,839.17 करोड़ पर पहुंच गया। इसी के साथ, तिमाही के लिए स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 196% का जबरदस्त उछाल देखा गया, जो ₹142.66 करोड़ रहा।
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) की बात करें तो थंगामयिल ज्वैलरी ने मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 73.17% बढ़कर कुल ₹8,513.75 करोड़ रहा। वहीं, पूरे साल का नेट प्रॉफिट 196.23% की शानदार बढ़ोतरी के साथ ₹351.65 करोड़ पर पहुंच गया।
शेयरधारकों को रिटर्न देने की अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए, कंपनी ने ₹18 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) भी सुझाया है। कंपनी के ऑडिटर्स ने वित्तीय बयानों पर एक स्पष्ट, बिना किसी आपत्ति वाली राय दी है, जो पारदर्शिता को दर्शाता है।
थंगामयिल ज्वैलरी तमिलनाडु में सोने, हीरे और चांदी के गहनों की एक जानी-मानी रिटेलर है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में कंपनी ने लगभग ₹4,916.30 करोड़ का स्टैंडअलोन रेवेन्यू और ₹1,187.10 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया था। FY26 में यह दमदार प्रदर्शन ग्राहकों की मांग को भुनाने की कंपनी की क्षमता को दिखाता है।
अच्छे नतीजों के बावजूद, कंपनी बढ़ती परिचालन लागतों (Operational Costs) से निपट रही है। कुल खर्च FY25 के ₹4,756.38 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹8,042.50 करोड़ हो गया। इसके अलावा, नए लेबर कोड के प्रावधानों के कारण ₹2.38 करोड़ का एकमुश्त खर्च भी हुआ। हाल ही में सोना और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी (Import Duty) का 6% से बढ़कर 15% होना भी भविष्य के प्रॉफिट मार्जिन के लिए एक संभावित चुनौती है।
कंपनी की 73.17% की FY26 रेवेन्यू ग्रोथ, Titan Company जैसी बड़ी कंपनियों की तुलना में काफी अधिक है। यह असाधारण प्रॉफिट ग्रोथ बाजार में थंगामयिल की वर्तमान गति को रेखांकित करती है।
आगे चलकर, निवेशक कुछ प्रमुख कारकों पर नजर रखेंगे। इनमें बढ़ती लागतों को नियंत्रित करने के लिए प्रबंधन (Management) की रणनीतियां, बढ़ी हुई सोने और चांदी की इम्पोर्ट ड्यूटी का बिक्री मात्रा और मार्जिन पर प्रभाव, और कंपनी की उच्च विकास दर बनाए रखने की योजनाएं शामिल हैं। डिविडेंड भुगतान और किसी भी संभावित शेयर बायबैक प्रोग्राम (Share Buyback Program) का विवरण, साथ ही विस्तार योजनाओं या नए शोरूम लॉन्च पर भी ध्यान दिया जाएगा।