पूरे साल की कमाई में वापसी
Super Sales India ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए ₹3.57 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल ₹1.76 करोड़ के लॉस से एक अहम सुधार है। कंपनी ने ₹2.50 प्रति शेयर का डिविडेंड (Dividend) भी रेकमेंड किया है। पूरे फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का टोटल रेवेन्यू 1.72% बढ़कर ₹419.53 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹412.45 करोड़ था। एनुअल ईपीएस (EPS) ₹11.61 रहा। कंपनी के ऑडिटर ने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर अनमोडिफाइड ओपिनियन जारी किया है।
क्वार्टर (Q4) के नतीजे चिंताजनक
हालांकि, FY26 के चौथे क्वार्टर (Q4) के नतीजे थोड़े चिंताजनक रहे। इस तिमाही में टोटल रेवेन्यू 2.17% घटकर ₹104.96 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹107.28 करोड़ था। इसी वजह से क्वार्टर में कंपनी को ₹1.39 करोड़ का नेट लॉस झेलना पड़ा, जबकि पिछले साल की Q4 में यह लॉस ₹1.76 करोड़ था। क्वार्टरली ईपीएस (EPS) (₹4.51) नेगेटिव रहा।
बढ़ता कर्ज़ और घटती इक्विटी
निवेशकों की नजर कंपनी की बैलेंस शीट पर भी रहेगी, जहां कुछ दबाव के संकेत दिख रहे हैं। कंपनी के कुल बोरिंग्स (Borrowings) में काफी बढ़ोतरी हुई है। नॉन-करंट बोरिंग्स बढ़कर ₹8.30 करोड़ हो गई हैं, जो पिछले साल शून्य थीं। वहीं, करंट बोरिंग्स ₹86.21 करोड़ से बढ़कर ₹101.60 करोड़ पर पहुंच गई हैं। साथ ही, 31 मार्च 2026 तक टोटल इक्विटी (Equity) घटकर ₹486.69 करोड़ रह गई, जो एक साल पहले ₹564.92 करोड़ थी। एक बार के रेगुलेटरी एडजस्टमेंट के तौर पर नए लेबर कोड लागू करने के कारण कंपनी ने ₹28.97 लाख का एक्सेप्शनल एक्सपेंस भी दर्ज किया।
मार्केट में स्थिति
Super Sales India देश भर में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Consumer Durables) और इलेक्ट्रॉनिक्स का रिटेल करती है। हालांकि कंपनी साल भर के लिए प्रॉफिट में लौट आई है, लेकिन इसका स्केल इंडस्ट्री के बड़े प्लेयर्स की तुलना में काफी छोटा है। FY26 में Super Sales India का रेवेन्यू ₹419.53 करोड़ था, जबकि Crompton Greaves Consumer Electricals जैसी कंपनियों का रेवेन्यू ₹6,000-7,000 करोड़ और V-Guard Industries का ₹3,500-4,500 करोड़ रहा है। कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन और बैलेंस शीट के मेट्रिक्स इन बड़े प्लेयर्स से काफी अलग हैं।
आगे क्या देखें?
आगे चलकर, निवेशक Super Sales India की लगातार तिमाही प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे। मैनेजमेंट की कर्ज को मैनेज करने और बैलेंस शीट को मजबूत करने की रणनीति एक मुख्य फोकस रहेगी। रिटेल ऑपरेशंस की ग्रोथ और ऑपरेशनल कॉस्ट को मैनेज करने की क्षमता भी भविष्य के परफॉर्मेंस के लिए महत्वपूर्ण होगी।