कर्ज़ का बोझ कैसे घटाया?
Sharp India Limited ने एक बड़ी फाइनेंसियल स्ट्रैटेजी के तहत अपने ₹145.34 करोड़ के बाहरी कर्ज (ECBs) को थर्ड पार्टी को बेच दिया है। इस ट्रांसफर के बदले कंपनी को ₹9.12 करोड़ की रकम मिली है। इस डील से कंपनी की कुल देनदारियों में लगभग ₹136 करोड़ की भारी कमी आई है।
इस बड़े कर्ज कटौती से Sharp India के फाइनेंशियल रेश्यो में सुधार होने की उम्मीद है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब जापान की Sharp Corporation अपनी भारतीय यूनिट में 75% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है, जो बड़े कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग का संकेत देता है।
हालांकि, यह कर्ज़ ट्रांसफर 'as is where is' बेसिस पर किया गया है। इसका मतलब है कि खरीदार मौजूदा सभी शर्तों और देनदारियों को स्वीकार करेगा, बिना Sharp India से किसी वारंटी के। इसके अलावा, दो ट्रांसफर इस बात पर निर्भर करते हैं कि Sharp Corporation द्वारा Sharp India के इक्विटी शेयर का ट्रांसफर सफल होता है या नहीं। अगर शेयर ट्रांसफर नहीं हुए, तो ये खास कर्ज़ असाइनमेंट भी नहीं हो पाएंगे।
इस स्ट्रक्चर के कारण, कर्ज़ कम होने के बावजूद, कंपनी और खरीदारों के लिए कुछ जटिलताएं और जोखिम बने हुए हैं।
