प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट का असर
Le Lavoir Ltd. ने हाल ही में ₹0.23 करोड़ (यानी ₹22.80 लाख) के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए नई इक्विटी जारी की है। इस ट्रांजेक्शन के तहत, अशोक दिलीपकुमार जैन और उनसे जुड़े लोगों (Persons Acting in Concert) ने 2,28,000 इक्विटी शेयर खरीदे हैं। इस खरीदारी के बाद, कंपनी में उनकी संयुक्त हिस्सेदारी पहले के 3.44% से बढ़कर 9.78% हो गई है। इस अलॉटमेंट के बाद कंपनी का कुल इक्विटी शेयर कैपिटल ₹3.24 करोड़ से बढ़कर ₹3.47 करोड़ हो गया है।
कंपनी का बैकग्राउंड और भविष्य की राह
Le Lavoir, जो पहले ट्रेडिंग करती थी, अब मुख्य रूप से इंस्टीट्यूशनल लॉन्ड्री सर्विसेज और पैकेज्ड फूड सेक्टर (Ghantiram Foods Private Limited के अधिग्रहण के बाद) में काम कर रही है। कंपनी ने पहले भी वारंट्स और प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए कैपिटल रेज किया है, और अशोक दिलीपकुमार जैन ने अक्टूबर 2025 में हुई पिछली वारंट्स अलॉटमेंट में भी हिस्सा लिया था। यह हालिया प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट ऐसे ही किसी वारंट का कन्वर्जन हो सकता है।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें और जोखिम
यह बड़ी हिस्सेदारी वृद्धि अशोक दिलीपकुमार जैन और एसोसिएट्स का Le Lavoir के भविष्य के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत दे सकती है। हालांकि, कंपनी के लिए चुनौतियां भी बनी हुई हैं। कुछ एनालिस्ट्स ने स्टॉक को 'Sell' रेटिंग दी है। पिछले 5 सालों में कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में नेगेटिव CAGR दर्ज किया गया है। इसके अलावा, अभी भी काफी संख्या में वारंट्स बाकी हैं, जिनके कन्वर्ट होने पर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में और डाइल्यूशन का खतरा है।
एक माइक्रो-कैप कंपनी के तौर पर, Le Lavoir की सर्विस मिक्स (लॉन्ड्री और फूड) इसे अलग बनाती है। निवेशकों को अशोक दिलीपकुमार जैन और एसोसिएट्स के अगले डिस्क्लोजर, बाकी वारंट्स के कन्वर्जन और Ghantiram Foods के प्रदर्शन पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
