टैक्स अथॉरिटीज का नोटिस और कंपनी का रुख
इस ड्राफ्ट ऑर्डर में प्रस्तावित कुल डिसअलाउंस (Disallowances) में से ₹2,168.90 मिलियन (लगभग ₹216.9 करोड़) का हिस्सा ट्रांसफर प्राइसिंग (Transfer Pricing) से जुड़ा है। LG Electronics India ने स्पष्ट किया है कि वह इन प्रस्तावों को डिस्प्यूट रेजोल्यूशन पैनल के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराकर इनका पुरजोर विरोध करेगी। कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया है कि इस ड्राफ्ट ऑर्डर का कंपनी के फाइनेंस या कामकाज पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा।
टैक्स विवादों का लंबा सफर
यह मामला LG Electronics India के भारतीय टैक्स अथॉरिटीज के साथ चल रहे टैक्स संबंधी मुद्दों को दर्शाता है। कंपनी ने जनवरी 2026 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) के साथ एक एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (Advance Pricing Agreement - APA) को अंतिम रूप दिया था। इस APA ने अप्रैल 2014 से मार्च 2023 तक की अवधि के लिए मार्केटिंग इनटेंजिबल और पेरेंट कंपनी को दिए जाने वाले रॉयल्टी जैसे ट्रांसफर प्राइसिंग एडजस्टमेंट्स से जुड़े लम्बे समय से चले आ रहे विवादों को हल करने का काम किया था। इस समझौते से डायरेक्ट टैक्स (₹1,724.38 मिलियन) और रॉयल्टी पेमेंट्स (₹3,153.00 मिलियन) से जुड़ी कंटिंजेंट लायबिलिटीज (Contingent Liabilities) खत्म हो गई थीं।
अन्य सक्रिय मामले
हालांकि, 2025 के अंत की रिपोर्ट्स के अनुसार, इनकम टैक्स, एक्साइज और सर्विस टैक्स के ₹4,717 करोड़ के अन्य टैक्स विवाद अभी भी सक्रिय थे। इसके अलावा, जनवरी 2026 में कंपनी को डिजिटल साइनेज इम्पोर्ट्स पर ₹27.40 करोड़ का कस्टम्स डिमांड नोटिस भी मिला था, जिसकी भी कंपनी अपील करने की योजना बना रही है।
आगे क्या?
अब LG Electronics India की पूरी नजर डिस्प्यूट रेजोल्यूशन पैनल में विस्तृत आपत्तियां दाखिल करने पर है। यह FY2022-23 के लिए इनकम टैक्स अथॉरिटी के प्रस्तावों को चुनौती देने की कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत है। मुख्य जोखिम यह है कि यदि पैनल या उच्च न्यायालय इन डिसअलाउंस को बरकरार रखते हैं, तो कंपनी पर बड़ा टैक्स बोझ आ सकता है। लम्बा लिटिगेशन (Litigation) अनिश्चितता पैदा कर सकता है।