Q4 FY26: रेवेन्यू में उछाल, पर मार्जिन पर बढ़ी लागतों की मार
Jyothy Labs ने Q4 FY26 के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की आय में 7.7% की सालाना बढ़ोतरी हुई, जिससे यह ₹717 करोड़ पर पहुंच गई। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए रेवेन्यू 3.5% बढ़कर ₹2,944 करोड़ रहा।
कंपनी ने बताया कि यह ग्रोथ मुख्य रूप से वॉल्यूम में आई बढ़ोतरी की वजह से हुई है। विशेष रूप से, फैब्रिक केयर सेगमेंट ने तिमाही के दौरान 17.8% की जोरदार बढ़त दर्ज की। हाउसहोल्ड इंसेक्टिसाइड डिविजन ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे इस साल का लॉस कम होकर ₹5 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹25 करोड़ था।
Jyothy Labs पूरी तरह से डेट-फ्री (debt-free) है और उसके पास ₹1,000 करोड़ की भारी कैश रिजर्व है। कंपनी के बोर्ड ने ₹3.5 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश भी की है।
लागतों का दबाव: मार्जिन क्यों गिरा?
रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद, कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव साफ देखा गया। Q4 में ग्रॉस मार्जिन 400 बेसिस पॉइंट्स घटकर 45.2% पर आ गया, और EBITDA मार्जिन 330 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 13.5% पर पहुंच गया।
इसका मुख्य कारण बढ़ती इनपुट लागतें हैं, जैसे LABSA के दाम में उछाल और ग्लोबल टेंशन के चलते क्रूड ऑयल व पैकेजिंग मटेरियल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी। कंपनी की कुल लागत का 50-60% हिस्सा क्रूड ऑयल पर निर्भर इनपुट्स से आता है।
Jyothy Labs को इन बढ़ी हुई लागतों का असर ग्राहकों तक पहुंचाने में 2-3 महीने का समय लगता है। कंपनी ने हाल ही में 4% की कीमत बढ़ोतरी लागू की है, जिसका पूरा असर FY27 की दूसरी तिमाही तक दिखने की उम्मीद है।
आगे की राह और जोखिम
Jyothy Labs, भारत के FMCG सेक्टर की एक प्रमुख कंपनी है, जिसके Ujala और Exo जैसे ब्रांड घरों-घर में पहचाने जाते हैं। कंपनी नए एक्विजिशन (Acquisitions) के जरिए अपने कारोबार को और बढ़ाने पर विचार कर रही है।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और ग्लोबल टेंशन के कारण लागतों पर दबाव बना रह सकता है। FMCG सेक्टर में Hindustan Unilever (HUL) जैसी बड़ी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी एक चुनौती है। निवेशक आने वाली तिमाहियों में कीमत बढ़ोतरी के असर और मार्जिन रिकवरी पर खास नजर रखेंगे।
