Q3 FY26 में Himalaya Food के नतीजों का बड़ा खुलासा
Himalaya Food International के लिए 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि में ₹5 लाख से बढ़कर 1460% की उछाल के साथ ₹78 लाख पर पहुंच गया।
वहीं, कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में मामूली 2.80% की बढ़ोतरी देखी गई, जो पिछले साल के ₹967.86 लाख से बढ़कर ₹994.98 लाख हो गया।
मुनाफे में ज़बरदस्त उछाल का कारण: खर्चों में कटौती
इस ज़बरदस्त प्रॉफिट जंप की मुख्य वजह कंपनी की कॉस्ट कटिंग यानी खर्चों में की गई कटौती है। तिमाही के कुल खर्चे पिछले साल के ₹963.20 लाख से घटकर ₹917 लाख पर आ गए, जिससे मुनाफा बढ़ाने में मदद मिली।
नतीजों के पीछे छिपी अहम बातें
लेकिन, इन नतीजों के साथ कुछ अहम बातें भी सामने आई हैं, जिन पर निवेशकों को ज़रूर ध्यान देना चाहिए। कंपनी की फाइलिंग में नोट 1 के अनुसार, 'OTS इंटरेस्ट अमाउंट' को फाइनेंस कॉस्ट से बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि कंपनी ने अपने लोन सेटलमेंट प्रोग्राम से जुड़े कुछ ब्याज खर्चे रिपोर्टेड मुनाफे में शामिल नहीं किए हैं, जिससे रिपोर्टेड प्रॉफिट असल से ज्यादा दिख रहा है।
इसके अलावा, कंपनी के पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल में भी इस अवधि के दौरान बढ़त दर्ज की गई है, जो मौजूदा शेयरधारकों के लिए संभावित डाइल्यूशन (शेयरों का बढ़ना और हिस्सेदारी कम होना) का संकेत दे सकता है।
वित्तीय सुधार और भविष्य की रणनीति
Himalaya Food International अपने वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। कंपनी मार्च 2018 से NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) स्टेटस से जूझने के बाद अब बैंकों के साथ वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) पर आगे बढ़ रही है। Q3 FY26 तक, ₹43 करोड़ के एक नए OTS पर काम चल रहा था, जबकि अप्रैल 2023 में ₹82.80 करोड़ का एक बड़ा सेटलमेंट पहले ही हो चुका है।
कंपनी अपनी गैर-जरूरी संपत्तियों (non-core assets) और ज़मीन को बेचकर भी फंड जुटा रही है। साथ ही, कंपनी स्ट्रैटेजिक निवेशकों से पूंजी जुटाने और बाजार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। हाल ही में, कंपनी ने यूके (UK) में एंट्री ली है और US Foods के साथ वेंडर अप्रूवल भी हासिल किया है। इन कदमों का मकसद रेवेन्यू के स्रोतों में विविधता लाना है।
ऐतिहासिक रूप से, कंपनी अपने फ्रेंच फ्राइज़ बिजनेस को लेकर पूर्व ज्वाइंट वेंचर पार्टनर Simplot USA के साथ विवाद में भी रही है।
निवेशकों के लिए खास बातें
कुल मिलाकर, तिमाही के नतीजे ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाते हैं। लोन समाधान और संपत्ति की बिक्री पर कंपनी का फोकस स्पष्ट है। यूके और यूएस में नए बाज़ारों में प्रवेश भविष्य की ग्रोथ की उम्मीद जगाता है। हालांकि, फाइनेंस कॉस्ट से 'OTS इंटरेस्ट' को बाहर रखना और सिर्फ 2.8% की रेवेन्यू ग्रोथ चिंता का विषय बने हुए हैं। पेड-अप इक्विटी कैपिटल में बड़ी वृद्धि मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी को कम कर सकती है।
निवेशक कंपनी की OTS देनदारियों को सुलझाने और संपत्ति की बिक्री में प्रगति पर नज़र रखेंगे। यूके और यूएस में निर्यात वेंचर्स का प्रदर्शन रेवेन्यू में विविधता लाने के लिए महत्वपूर्ण होगा। Simplot JV विवाद से जुड़े कानूनी मामलों पर भी अपडेट ज़रूरी होगा। लागत बचत के अलावा, कंपनी की लगातार रेवेन्यू ग्रोथ हासिल करने की क्षमता उसके टर्नअराउंड का एक महत्वपूर्ण संकेतक होगी।
