Globus Spirits ने अपने कर्ज़ को काफी हद तक कम कर लिया है। कंपनी ने स्ट्रेटेजिक रिफाइनेंसिंग के ज़रिए अपने सालाना कर्ज़ भुगतान (Debt Repayment) को ₹67 करोड़ से घटाकर सिर्फ ₹14 करोड़ कर दिया है। इससे कंपनी के पास ₹53 करोड़ अतिरिक्त कैश उपलब्ध हो गया है।
इस मजबूत फाइनेंशियल पोजीशन और इंटरनल कैश जेनरेशन को देखते हुए, कंपनी ने फिलहाल इक्विटी कैपिटल जुटाने की अपनी योजनाओं को रोक दिया है।
एक तरफ जहां कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ सुधर रही है, वहीं दूसरी तरफ उसका कंज्यूमर बिज़नेस भी रफ्तार पकड़ रहा है। यह अब कंपनी के कुल रेवेन्यू का करीब 40% हिस्सा है। खासकर, कंपनी के प्रीमियम सेगमेंट 'Prestige & Above' (P&A) ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में 27% की शानदार ईयर-ओवर-ईयर ग्रोथ दर्ज की है।
Q4 FY26 में, कंपनी का EBITDA प्रति लीटर ₹8.3 रहा, जो कि ₹5-7 प्रति लीटर के अपने अनुमान से कहीं बेहतर है। हालांकि, मैनेजमेंट का कहना है कि एक्सपेंशन (Expansion) और इनपुट कॉस्ट (Input Costs) बढ़ने के कारण मार्जिन पर कुछ दबाव है।
यह कदम Globus Spirits को एक कंज्यूमर-फोक्स्ड कंपनी के तौर पर स्थापित करने की मंशा दिखाता है, जहां मैन्युफैक्चरिंग से जनरेट होने वाले कैश का इस्तेमाल ग्रोथ के लिए किया जाएगा। डेट रिफाइनेंसिंग से कंपनी की फाइनेंशियल पोजीशन मजबूत हुई है और ब्याज का बोझ भी कम हुआ है। इक्विटी रेज़िंग रोकने से शेयरहोल्डर्स के लिए डाइल्यूशन (Dilution) का खतरा कम हुआ है।
आगे चलकर, निवेशक कंपनी द्वारा ब्रांड डेवलपमेंट और कंज्यूमर आउटरीच पर फोकस करने की उम्मीद कर सकते हैं। बढ़े हुए कैश और कम ब्याज दरें नेट प्रॉफिट और फ्री कैश फ्लो को बूस्ट कर सकती हैं। कंपनी का लक्ष्य FY29 तक P&A रेवेन्यू में ₹500 करोड़ तक पहुंचने का है।
हालांकि, कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। रेगुलेटरी (Regulatory) दिक्कतें, इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव और दिल्ली की अनसुलझी लिकर पॉलिसी (Liquor Policy) कंपनी के लिए चिंता का विषय हैं। दिल्ली में कंपनी ने स्थिति स्थिर होने तक अपने ऑपरेशंस सीमित कर दिए हैं।
इंडस्ट्री में भी कॉम्पिटिटर्स जैसे United Spirits और Radico Khaitan भी प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस कर रहे हैं, जो इस ट्रेंड को दर्शाता है। Globus Spirits अपनी 27% P&A ग्रोथ के साथ इन कंपनियों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
