Vedanta के FY26 के नतीजे: रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन!
Vedanta Limited ने अपने सभी सेगमेंट्स में दमदार प्रदर्शन करते हुए वित्त वर्ष 2026 (FY26) में अब तक का सबसे बेहतरीन फाइनेंशियल ईयर दर्ज किया है। कंपनी ने ₹1,74,075 करोड़ का रिकॉर्ड कंसोलिडेटेड रेवेन्यू और ₹25,096 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) हासिल किया, जो पिछले साल की तुलना में 22% ज्यादा है।
FY26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी की रफ्तार बनी रही। इस तिमाही में रेवेन्यू 29% बढ़कर ₹51,524 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि PAT 89% की जबरदस्त उछाल के साथ ₹9,352 करोड़ पर दर्ज किया गया।
ऑपरेशनल स्ट्रेंथ का ही नतीजा है कि Vedanta ने FY26 के लिए अपना अब तक का सबसे हाई EBITDA ₹55,976 करोड़ दर्ज किया, जो पिछले साल से 29% अधिक है। इससे कंपनी का नेट डेट/EBITDA रेश्यो घटकर 0.95x हो गया, जो Q4 FY25 में 1.22x था। कंपनी ने इस दौरान ग्रोथ कैपिटल एक्सपेंडिचर (Growth Capital Expenditure) में ₹14,918 करोड़ का निवेश भी किया है।
डी-मर्जर: वैल्यू अनलॉक करने की स्ट्रैटेजी
Vedanta एल्युमीनियम, जिंक-लेड-सिल्वर, ऑयल एंड गैस, आयरन ओर, स्टील, कॉपर और पावर जैसे सेक्टर्स में कारोबार करती है। कंपनी अपनी संरचना को सरल बनाने और भविष्य के विकास को गति देने के लिए एक बड़ा डी-मर्जर कर रही है, जो 1 मई, 2026 से प्रभावी होगा।
इस स्ट्रैटेजिक मूव के तहत Vedanta को पांच अलग-अलग, सेक्टर-स्पेसिफिक एंटिटीज में बांटा जाएगा, जो स्वतंत्र रूप से लिस्ट होंगी। इसका मकसद बिजनेस लाइन्स को स्पष्ट करना और फोकस इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देकर शेयरहोल्डर वैल्यू को बढ़ाना है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
डी-मर्जर के बाद शेयरधारकों को नई लिस्ट होने वाली एंटिटीज के शेयर मिलेंगे, जिससे वे 'प्योर-प्ले' बिजनेसेस के पोर्टफोलियो का हिस्सा बन जाएंगे। इस सरलीकरण से कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) बेहतर होगा और हर यूनिट के लिए तेज ग्रोथ और बेहतर वैल्यूएशन की उम्मीद है।
मुख्य रिस्क और आगे क्या देखना है?
फिलहाल, CRISIL और ICRA जैसे क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने कंपनी की रेटिंग को 'Watch with Developing Implications' पर रखा है, जो डी-मर्जर और मार्केट की अनिश्चितताओं को दर्शाता है। इसके अलावा, मेटल और फाइनेंशियल मार्केट्स में उतार-चढ़ाव, एक्सचेंज रेट और कमोडिटी प्राइस भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। कंपनी ऑयल एंड गैस सेगमेंट में कैम्बे ब्लॉक को लेकर मुकदमेबाजी का सामना भी कर रही है।
निवेशकों को 1 मई, 2026 से शुरू होने वाले डी-मर्ज्ड एंटिटीज की लिस्टिंग पर नजर रखनी चाहिए। क्रेडिट रेटिंग पर 'Watch' का असर और कैम्बे ब्लॉक मुकदमे का अंतिम समाधान भी महत्वपूर्ण डेवलपमेंट होंगे।
