FY26 में कंपनी का लेखा-जोखा
Sandur Manganese & Iron Ores ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) में ₹5,08,842 लाख (यानी ₹5,088.42 करोड़) का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया। यह पिछले साल की तुलना में 62.31% की बड़ी छलांग है। कंपनी के नेट प्रॉफिट में भी 39.83% की वृद्धि देखी गई, जो ₹65,807 लाख (यानी ₹658.07 करोड़) रहा। कंपनी की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में भी अच्छी रफ्तार बनी रही, जहाँ रेवेन्यू 14.39% बढ़कर ₹1,51,139 लाख पर पहुंच गया।
कर्ज में भारी कमी
FY26 में कंपनी की एक बड़ी कामयाबी अपने कर्ज को काफी हद तक घटाना रही। नॉन-करंट बोरिंग (Non-current borrowings) फाइनेंशियल ईयर के अंत तक घटकर ₹57,822 लाख रह गई, जो FY25 में ₹1,33,547 लाख थी। यह 50% से भी ज्यादा की कमी है, जो कंपनी ने ₹42,300 लाख के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) को इंटरनल कैश फ्लो से चुकाकर हासिल की। इस कदम से कंपनी की बैलेंस शीट काफी मजबूत हुई है।
कंपनी का कारोबार
Sandur Manganese & Iron Ores मुख्य रूप से आयरन ओर (iron ore) और मैंगनीज ओर (manganese ore) का खनन करती है, साथ ही फेरोअलॉयज (ferroalloys) का उत्पादन भी करती है। कंपनी के माइनिंग ऑपरेशन कर्नाटक के सैंडूर तालुका में स्थित हैं। FY26 में रेवेन्यू में आई यह भारी ग्रोथ इसके उत्पादों की मजबूत मांग और बेहतर ऑपरेशनल मैनेजमेंट को दर्शाती है।
बड़े रिस्क और एकमुश्त खर्च
कंपनी के सामने सबसे बड़ा सरदर्द कर्नाटक हाई कोर्ट के एक फैसले से जुड़ा ₹13,125 लाख (यानी ₹131.25 करोड़) का कॉम्पेंसैटरी एफोरेस्टेशन चार्ज (compensatory afforestation charge) का डिमांड है। कंपनी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रही है। इसके अलावा, कंपनी ने नए लेबर कोड नोटिफिकेशन्स के कारण बढ़ी हुई ग्रेच्युटी लायबिलिटी (gratuity liabilities) के चलते ₹3,227 लाख (यानी ₹32.27 करोड़) का एक वन-टाइम एक्सेप्शनल चार्ज (one-time exceptional charge) भी दर्ज किया है।
इंडस्ट्री में जगह और आगे का रास्ता
MOIL Ltd (भारत की सबसे बड़ी मैंगनीज ओर उत्पादक) और NMDC Ltd (प्रमुख आयरन ओर उत्पादक) जैसी कंपनियों के मुकाबले, Sandur Manganese का बिजनेस मॉडल थोड़ा अलग है, क्योंकि यह ओर माइनिंग के साथ-साथ फेरोअलॉय प्रोडक्शन भी करती है। निवेशक अब एफोरेस्टेशन चार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे। साथ ही, कमोडिटी की कीमतों का ट्रेंड और मैनेजमेंट की ओर से ग्रेच्युटी लायबिलिटी पर कमेंट्री कंपनी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगी।
