APTEL के फैसले से कैसे चमकी कंपनी?
Ponni Sugars को टैरिफ रिवीजन से जुड़े मामले में अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) से ₹51.64 करोड़ का एक बड़ा फ़ैसला मिला, जिसने कंपनी के मुनाफे को चार चांद लगा दिए। इस एकमुश्त लाभ के चलते, कंपनी का नेट प्रॉफिट FY26 में 149.12% बढ़कर ₹48.03 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹19.28 करोड़ था।
चौथी तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी का प्रदर्शन दमदार रहा, जहाँ नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 488.96% की तेजी के साथ ₹26.68 करोड़ रहा।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस और चिंताएं
आंकड़ों पर गौर करें तो, FY26 में Ponni Sugars की कुल स्टैंडअलोन इनकम 15.63% बढ़कर ₹429.46 करोड़ दर्ज की गई। शुगर सेगमेंट से रेवेन्यू भी पिछले साल के ₹32,602 लाख से बढ़कर ₹36,511 लाख हो गया।
हालांकि, यह जानना ज़रूरी है कि FY26 में मुनाफे की जो बड़ी ग्रोथ दिख रही है, वह APTEL के फैसले से मिले विशेष, गैर-आवर्ती (non-recurring) लाभ से संचालित है। यह असली ऑपरेशनल परफॉरमेंस के ट्रेंड को छुपा सकता है, इसलिए इसे केवल एक बार के फायदे के तौर पर ही देखना चाहिए।
टैक्स से जुड़ी बड़ी चुनौतियां
कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती टैक्स से जुड़ी हुई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के तहत जांच शुरू कर चुका है। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने ₹20.53 करोड़ के 'MAT Credit Receivable' को राइट-डाउन (write-down) भी किया है, जिसने टैक्स खर्च को बढ़ाया है। ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े इस मुकदमेबाजी के कारण अतिरिक्त टैक्स प्रावधान ₹634 लाख का भी करना पड़ा है। 'MAT credit receivable' में ₹2,053 लाख का राइट-डाउन भी हुआ है, जिसका कंपनी के टैक्स खर्चों पर काफी असर पड़ा है।
आगे क्या?
इन सब के बीच, कंपनी ने ₹5.00 प्रति शेयर का डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है। शेयरधारकों को यह समझना होगा कि APTEL का लाभ एक बार का है, और कंपनी का भविष्य मौजूदा टैक्स मुकदमेबाजी के नतीजों पर निर्भर करेगा। शुगर प्रोडक्शन के मौसमी (seasonal) होने के कारण, तिमाही नतीजे हमेशा पूरे साल के ऑपरेशनल प्रदर्शन को नहीं दर्शाते।
