Lloyds Enterprises ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के नतीजों के साथ निवेशकों के लिए एक नई ग्रोथ स्टोरी पेश की है। कंपनी ने सिर्फ अपने मुनाफे में भारी बढ़ोतरी ही नहीं दर्ज की है, बल्कि अपने रियल एस्टेट बिजनेस को एक नई कंपनी में अलग करने की बड़ी स्ट्रेटेजिक प्लानिंग भी बताई है।
कमाई के आंकड़े चौंकानें वाले
कंपनी ने इस फाइनेंशियल ईयर में ₹416.96 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल यानी FY25 के ₹123.39 करोड़ की तुलना में 237.92% ज्यादा है। वहीं, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू भी 39.01% बढ़कर ₹2,183.71 करोड़ पर पहुंच गया है।
स्टैंडअलोन प्रदर्शन भी दमदार
अगर स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों की बात करें, तो यहां भी कंपनी ने कमाल कर दिया है। स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 1531.71% का भारी उछाल देखा गया, जो ₹268.09 करोड़ रहा, जबकि स्टैंडअलोन रेवेन्यू 29.57% बढ़कर ₹812.09 करोड़ हो गया। ये आंकड़े कंपनी के मजबूत टर्नअराउंड (Turnaround) को दर्शाते हैं।
नई ग्रोथ इंजन: गोल्ड माइनिंग और रियल एस्टेट
इस ग्रोथ के पीछे कंपनी की कई बड़ी रणनीतिक पहलें हैं। Lloyds Enterprises ने भारत की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन (Gold Mine) के विकास के लिए Geomysore Services India Pvt Ltd में ₹200 करोड़ का निवेश कर 31% हिस्सेदारी खरीदी है। साथ ही, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में रियल एस्टेट ऑपरेशंस का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जहां MOU (Memorandum of Understanding) के ज़रिए 270 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर ₹5,000 करोड़ से ज़्यादा के रेवेन्यू की संभावना है।
रियल एस्टेट का होगा बंटवारा
कंपनी अपने रियल एस्टेट बिजनेस को 'Lloyds Realty Limited' नाम की एक नई, स्वतंत्र कंपनी में डीमर्ज (Demerge) करने की योजना बना रही है। इससे रियल एस्टेट डिविजन को अपनी वैल्यू अनलॉक करने और अलग से मैनेजमेंट व कैपिटल स्ट्रेटेजी बनाने में मदद मिलेगी। Lloyds Enterprises अब अपने बाकी ट्रेडिंग, इन्वेस्टमेंट और नए गोल्ड माइनिंग वेंचर्स पर फोकस करेगी। शेयरहोल्डर्स को दोनों स्पेशलाइज्ड कंपनियों में हिस्सेदारी मिलेगी, जिससे ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और हर बिजनेस अपने ग्रोथ पाथ पर आगे बढ़ पाएगा।
कंपनी की पृष्ठभूमि
Lloyds Enterprises लिमिटेड, जिसे पहले Llyods Steel Industries Ltd के नाम से जाना जाता था, अब इंजीनियरिंग, रियल एस्टेट, ट्रेडिंग, इन्वेस्टमेंट और गोल्ड माइनिंग जैसे कई सेक्टर्स में सक्रिय है। कंपनी ने स्टील एसेट्स बेचकर हाई-ग्रोथ सेक्टर्स पर फोकस किया है।
आगे क्या उम्मीद करें
- रियल एस्टेट बिजनेस का सफल डीमार्जर।
- गोल्ड माइन का ऑपरेशनल रैंप-अप और शुरुआती प्रोडक्शन।
- रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में प्रोग्रेस।
- Lloyds Enterprises (डीमार्जर के बाद) और नई Lloyds Realty दोनों का मार्केट परफॉर्मेंस।
- ट्रेडिंग और अन्य एसेट्स में भविष्य के इन्वेस्टमेंट।
इंडस्ट्री से तुलना
रियल एस्टेट में Oberoi Realty और माइनिंग सेक्टर में Vedanta Ltd जैसी कंपनियां बेंचमार्क के तौर पर देखी जा सकती हैं।
Key Financial Metrics (मुख्य वित्तीय आंकड़े)
- कंसोलिडेटेड रेवेन्यू FY25 के ₹1,570.93 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹2,183.71 करोड़ हुआ।
- कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) FY25 के ₹123.39 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹416.96 करोड़ हुआ।
- स्टैंडअलोन रेवेन्यू FY25 के ₹626.76 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹812.09 करोड़ हुआ।
- स्टैंडअलोन PAT FY25 के ₹16.43 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹268.09 करोड़ हुआ।
