Deccan Gold Mines ने FY26 में घटाया घाटा, पर नजरें प्रोजेक्ट पर
Deccan Gold Mines ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए अपने ऑडिट किए गए वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस घटकर ₹76.07 करोड़ हो गया है, जबकि कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹14.20 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी बोर्ड की मीटिंग में इन नतीजों को मंजूरी दी गई।
वित्तीय प्रदर्शन में सुधार
पिछले साल के ₹83.70 करोड़ के घाटे की तुलना में यह एक अच्छी खबर है, जो लागत प्रबंधन और परिचालन दक्षता में सुधार का संकेत देती है। कंपनी ने स्टैंडअलोन बेसिस पर भी अपने नेट लॉस को काफी कम किया है।
ऑडिटर की राय और निरंतरता
कंपनी के वैधानिक ऑडिटर, V.K Beswal & Associates, ने वित्तीय रिपोर्टिंग पर अपनी संतुष्टि जाहिर की है और अनमॉडिफाइड ओपिनियन (Unmodified Opinion) दिया है। इंटरनल ऑडिटर की फिर से नियुक्ति भी सुनिश्चित की गई है, जिससे वित्तीय निगरानी में निरंतरता बनी रहेगी।
मुख्य जोखिम: लोन रिकवरी गोल्ड प्रोडक्शन पर निर्भर
लेकिन, Deccan Gold Mines के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है ₹190.16 करोड़ के एक इंटर-कंपनी लोन की रिकवरी। यह लोन कंपनी की सब्सिडियरी Avelum Partner LLC को दिया गया था, और इसकी वापसी पूरी तरह से रूस में चल रहे Altyn Tor Gold Project से होने वाले कॉमर्शियल गोल्ड प्रोडक्शन पर निर्भर करती है।
प्रोजेक्ट टाइमलाइन और सब्सिडियरी का दबाव
इस प्रोजेक्ट से उत्पादन FY 2026-27 तक शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन ऐतिहासिक देरी को देखते हुए लोन की रिकवरी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा, Deccan Gold Mozambique Limitada और Deccan Gold (TZ) Private Limited जैसी अन्य सब्सिडियरी कंपनियां भी वित्तीय दबाव में हैं, जो उनकी वर्तमान नेट करंट एसेट्स (Net Current Assets) में नकारात्मकता से जाहिर होता है।
कंपनी का बैकग्राउंड
FY26 में कंपनी ने प्रोजेक्ट डेवलपमेंट पर ₹314.70 करोड़ खर्च किए हैं। भारतीय शेयर बाजार में Deccan Gold Mines जैसी प्योर गोल्ड एक्सप्लोरेशन कंपनियां कम हैं। हालांकि, Vedanta Limited और Hindustan Zinc Limited जैसी बड़ी माइनिंग कंपनियों से तुलना की जा सकती है, जो खनन क्षेत्र में अलग-अलग पैमाने और परिचालन चरणों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
आगे क्या देखना होगा
ऐसे में निवेशकों की नजर Altyn Tor Gold Project से प्रोडक्शन की टाइमलाइन, सब्सिडियरी कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और मैनेजमेंट की भविष्य की लागत नियंत्रण व फंडिंग रणनीतियों पर बनी रहेगी।
