SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) ढांचे के तहत, बड़ी कंपनियों पर अपने कुछ फंड्स को लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज के ज़रिए जुटाने का नियम है। White Organic Agro के इस कैटेगरी में न आने से उसे इन सख़्त नियमों से आज़ादी मिल गई है, जिससे फंड जुटाने की उसकी अपनी रणनीति में ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) आई है। आमतौर पर, LC स्टेटस के लिए ₹1000 करोड़ से ज़्यादा का लॉन्ग-टर्म कर्ज और 'AA' या उससे ऊपर की क्रेडिट रेटिंग जैसी शर्तें होती हैं, जिन्हें कई छोटी या सीमित कर्ज वाली कंपनियां पूरा नहीं कर पातीं।
यह राहत तब मिली है जब कंपनी पिछले कुछ समय से मुश्किलों का सामना कर रही है। मई 2024 में, SEBI ने कंपनी और उसके प्रमोटर्स पर फाइनेंशियल स्टेटमेंट में हेरफेर, फर्जी बिक्री और 'पंप एंड डंप' स्कीम जैसे गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके चलते उन्हें सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया गया था। कंपनी ने मार्च 2025 में ₹95.55 लाख का भुगतान कर SEBI के साथ इस मामले को सुलझा लिया था।
वित्तीय मोर्चे पर भी कंपनी की हालत चिंताजनक रही है। हाल के क्वार्टरों में कंपनी ने नेट लॉस (शुद्ध घाटा) दर्ज किया है और पिछले पांच सालों में सेल्स ग्रोथ में लगातार गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप (बाजार पूंजीकरण) करीब ₹14.2 करोड़ है, और प्रमोटर्स की हिस्सेदारी लगभग 25.5% है। 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुए नौ महीनों में, कंपनी ने ₹15.84 लाख का नेट लॉस रिपोर्ट किया था।
White Organic Agro अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जिसने नॉन-LC स्टेटस की पुष्टि की हो। Jumbo Finance Ltd ने भी 31 मार्च 2026 तक 'लार्ज कॉर्पोरेट' न होने की पुष्टि की है। यह दिखाता है कि कई छोटी या वित्तीय रूप से संघर्ष कर रही कंपनियां SEBI के LC नियमों के तहत आने वाले कर्ज जुटाने की बाध्यताओं से मुक्त हैं।
