सेबी के नियमों का पालन, RTA का सर्टिफिकेट
Vivimed Labs Ltd ने स्टॉक एक्सचेंजेज़ को एक कंप्लायंस सर्टिफिकेट सौंपा है। इसके अनुसार, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही, जो 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुई, के लिए SEBI (डिपॉजिटरीज़ एंड पार्टिसिपेंट्स) रेगुलेशंस, 2018 का पालन किया है। यह सर्टिफिकेट कंपनी के रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट (RTA) Aarthi Consultants Private Limited द्वारा जारी किया गया है, और यह 1 जनवरी से 31 मार्च, 2026 की अवधि को कवर करता है।
डिपॉजिटरी नियमों का महत्व
SEBI के डिपॉजिटरी नियमों का पालन करना शेयर ट्रांसफर, डीमटेरियलाइजेशन और इन्वेस्टर सर्विसेज के सुचारू संचालन के लिए बेहद जरूरी है। RTA का सर्टिफिकेट यह सुनिश्चित करता है कि शेयरहोल्डिंग रिकॉर्ड्स और संबंधित प्रक्रियाएं नियामक आवश्यकताओं के अनुसार ठीक से प्रबंधित की जा रही हैं। यह कदम निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद करता है।
कंपनी की पिछली चुनौतियां
हैदराबाद स्थित फार्मास्यूटिकल्स और स्पेशियलिटी केमिकल्स बनाने वाली Vivimed Labs हाल के दिनों में कई रेगुलेटरी और फाइनेंशियल दिक्कतों से गुजरी है। एक समय इसके शेयरों को ट्रेडिंग से निलंबित भी किया गया था, जिसे 18 दिसंबर, 2025 से प्रभावी रूप से हटा दिया गया था। यह कंपनी द्वारा SEBI के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स के तहत पिछली नॉन-कंप्लायंस (गैर-अनुपालन) समस्याओं को ठीक करने के प्रयासों के बाद हुआ था।
Vivimed Labs का SEBI के साथ पेनल्टी का भी इतिहास रहा है। नवंबर 2022 में, इसे अपनी सब्सिडियरी के फंड जुटाने को लेकर अपर्याप्त खुलासे करने के लिए ₹5 लाख का जुर्माना भरना पड़ा था। इससे पहले, जुलाई 2014 में, SEBI ने डिविडेंड पेमेंट डेट्स का खुलासा न करने पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया था।
फाइनेंशियल स्थिति और कानूनी मामले
फाइनेंशियल मोर्चे पर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने मार्च 2022 में एक फोरेंसिक ऑडिट शुरू किया था, जिसका कारण कर्ज भुगतान में देरी और अकाउंट का नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बन जाना था। इसके चलते डेट रीस्ट्रक्चरिंग का प्रस्ताव आया था। हाल ही में, फरवरी 2026 में, Vivimed Labs ने तेलंगाना हाई कोर्ट से CBI प्रोसीडिंग्स और SBI द्वारा बैंक फ्रॉड की घोषणा के संबंध में एक इंटरिम स्टे (अंतरिम रोक) प्राप्त किया। अप्रैल 2026 में, कंपनी SEBI के नियमों के तहत 'लार्ज कॉर्पोरेट' क्लासिफिकेशन से भी बाहर निकली, जिसका असर फंड जुटाने की उसकी क्षमता पर पड़ा।
इस फाइलिंग के मायने
डिपॉजिटरी नियमों के अनुपालन की यह पुष्टि कंपनी के ऑपरेशनल डिसिप्लिन में सुधार का संकेत देती है, जो बाजार के लिए एक सकारात्मक खबर है। यह नियामक मानकों के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है, जो पिछली कंप्लायंस मुद्दों और फाइनेंशियल मुश्किलों के बाद निवेशकों का भरोसा फिर से बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।