SEBI के 'Large Corporate' फ्रेमवर्क से बाहर TANFAC
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) का 'Large Corporate' फ्रेमवर्क 1 अप्रैल, 2024 से लागू हुआ है। इसका मकसद बड़ी और स्थापित कंपनियों के लिए फंड जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। लेकिन, TANFAC Industries की वित्तीय स्थिति इस कैटेगरी में आने के लिए काफी नहीं है।
31 मार्च, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, TANFAC Industries का नेट वर्थ ₹373.17 करोड़ रहा। कंपनी पर ₹92.60 करोड़ का शॉर्ट-टर्म कर्ज (Short-term borrowings) बकाया है, जबकि कोई लॉन्ग-टर्म कर्ज (Long-term borrowings) नहीं है। कंपनी की क्रेडिट रेटिंग अभी भी मजबूत है, जिसमें लॉन्ग-टर्म के लिए A+(Stable) और शॉर्ट-टर्म के लिए A1+ रेटिंग मिली हुई है।
इस क्लासिफिकेशन (Classification) के न मिलने का सीधा मतलब यह है कि TANFAC Industries उन खास और आसान डेट इश्यूएंस (Debt issuance) चैनलों का इस्तेमाल नहीं कर पाएगी जो 'Large Corporates' के लिए उपलब्ध हैं। इसके चलते, भविष्य में कंपनी के लिए फंड रेजिंग (Fund raising) के प्रयास अधिक जटिल और सख्त नियमों के दायरे में आ सकते हैं।
स्पेशियलिटी केमिकल्स (Specialty Chemicals) सेक्टर में TANFAC Industries एक जाना-पहचाना नाम है, जो हाइड्रोफ्लोरिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे उत्पाद बनाती है। यह प्रतिष्ठित Sanmar Group का हिस्सा है। इसी ग्रुप की एक दूसरी कंपनी, Chemplast Sanmar Ltd., जो बड़े पैमाने पर काम करती है, SEBI के नियमों के तहत 'Large Corporate' का दर्जा पाने की उम्मीद है।