Q4 में दिखा दमदार प्रदर्शन
Supreme Petrochem Ltd ने फाइनेंशियल ईयर 2026 का अंत मजबूत चौथी तिमाही के साथ किया है। कंपनी का रेवेन्यू साल-दर-साल 3% बढ़कर ₹1,587 करोड़ पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण बिक्री की मात्रा (volumes) और प्रोडक्ट स्प्रेड्स (spreads) में सुधार रहा।
इसी तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) 75% की जोरदार छलांग लगाते हुए ₹253 करोड़ पर पहुंच गया। Q4 FY26 के लिए नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹168 करोड़ रहा, जो 10.59% का अच्छा मार्जिन दर्शाता है।
सालभर के प्रदर्शन में गिरावट का कारण
चौथी तिमाही के शानदार नतीजों के बावजूद, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए रेवेन्यू 11% घटकर ₹5,338 करोड़ रहा। इस गिरावट की मुख्य वजह सालभर के दौरान स्टाइरीन मोनोमर (Styrene Monomer - SM) की कीमतों में आई नरमी बताई जा रही है।
हालांकि, कंपनी की बिक्री की मात्रा (sales volumes) लचीली बनी रही, जो Q4 में 5.4% बढ़ी और पूरे फाइनेंशियल ईयर में 2% का इजाफा हुआ। कंपनी ने अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) को बनाए रखा, जिसमें कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (capacity utilization) लगातार 80% से ऊपर रहा।
कंपनी का विस्तार और प्रोजेक्ट्स
Supreme Petrochem भारत के पॉलीमर और पेट्रोकेमिकल सेक्टर की एक प्रमुख कंपनी है, जो पॉलीस्टाइरीन (PS) और एक्सपेंडेबल पॉलीस्टाइरीन (EPS) के उत्पादन के लिए जानी जाती है।
कंपनी अपनी क्षमता बढ़ाने में निवेश कर रही है। अप्रैल 2026 में नागोथाने में EPS फेज-II एक्सपेंशन चालू कर दिया गया है, जिससे 115,000 TPA (टन प्रति वर्ष) की क्षमता बढ़ी है।
लेकिन, हरियाणा में प्रस्तावित PS/EPS प्रोजेक्ट जैसे अन्य विस्तार योजनाओं में देरी हो रही है। यह प्रोजेक्ट फिलहाल होल्ड पर है, जो इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) द्वारा एक स्टाइरीन मोनोमर प्लांट चालू किए जाने का इंतजार कर रहा है।
नतीजों के बाद मुख्य बातें
शेयरहोल्डर (Shareholders) ABS प्लांट में आई महत्वपूर्ण उपकरण खराबी के बाद उसके पूरी तरह से ऑपरेशनल कैपेसिटी पर लौटने पर बारीकी से नजर रखेंगे।
कंपनी की सप्लाई चेन (supply chains) के सामान्य होने पर, खासकर 2026 के मध्य तक, फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए 8-10% की वॉल्यूम ग्रोथ के लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता टिकी हुई है।
फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए करीब ₹250 करोड़ का प्रस्तावित कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) ग्रोथ प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित होगा, जो वर्तमान ऑपरेशनल समस्याओं के समाधान पर निर्भर करेगा।
हरियाणा प्रोजेक्ट में देरी से उस क्षेत्र में भविष्य में क्षमता जोड़ने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ऑपरेशनल चुनौतियां और बाजार जोखिम
ABS प्लांट में एक गंभीर उपकरण खराबी ने इसकी क्षमता को 65% तक सीमित कर दिया है, जिसने उत्पादन पर काफी असर डाला है।
इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और सप्लाई चेन में रुकावटें, खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से, कच्चे माल की लागत और शिपमेंट के लिए जोखिम बने हुए हैं, जैसा कि मार्च 2026 में देखा गया था।
बाजार की बाधाओं और ऊंची कीमतों के कारण नॉन-OEM (Non-OEM) सेगमेंट में मांग कमजोर बताई जा रही है।
आगे क्या देखना होगा
निवेशकों को ABS प्लांट की ऑपरेशनल कैपेसिटी की बहाली, सप्लाई चेन का सामान्य होना, और हरियाणा प्रोजेक्ट के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के SM प्लांट के चालू होने के समय पर मैनेजमेंट की टिप्पणी पर ध्यान देना होगा।
