NCLT का इंसॉल्वेंसी पर आदेश
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने Supha Pharmachem Limited के लिए कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेसोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू करने का हुक्म जारी कर दिया है। यह आदेश 17 मार्च, 2026 को दिया गया, और इसके पीछे ₹7.47 करोड़ का एक बड़ा डिफॉल्ट है। यह देनदारी नवंबर 2023 से चली आ रही है। अब क्रेडिटर्स से 31 मार्च, 2026 तक अपने दावे पेश करने को कहा गया है। उम्मीद है कि CIRP की पूरी प्रक्रिया सितंबर 2026 तक पूरी हो जाएगी।
इंसॉल्वेंसी की वजह और कार्यवाही
NCLT के इस निर्देश से Supha Pharmachem के खिलाफ औपचारिक इंसॉल्वेंसी की कार्यवाही शुरू हो गई है। यह कदम Boston Ivy Healthcare Solution Private Limited द्वारा फाइल की गई एक पिटीशन के बाद उठाया गया है, जिसमें कंपनी पर ₹7.47 करोड़ का भारी डिफॉल्ट बताया गया था। इस CIRP प्रक्रिया के तहत, मिस्टर राजेश झुंझुनवाला को इंटरिम रेसोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) नियुक्त किया गया है, जो पूरी प्रक्रिया की देखरेख करेंगे। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के अधिकार तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं और कंपनी की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए एक मोरैटोरियम (स्थगन) भी लागू कर दिया गया है।
शेयरहोल्डर्स और क्रेडिटर्स पर असर
कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेसोल्यूशन प्रोसेस में कंपनी का जाना, Supha Pharmachem के लिए गंभीर वित्तीय संकट का संकेत है। ऐसे में शेयरहोल्डर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि कंपनी अब कर्ज चुकाने के लिए रीस्ट्रक्चरिंग से गुजरेगी या हो सकता है कि संपत्ति बेचनी पड़े। मोरैटोरियम लागू होने से कंपनी के खिलाफ कोई भी नया कानूनी एक्शन या रिकवरी का प्रयास रुक जाएगा, जिससे संपत्तियों को बचाया जा सकेगा, लेकिन सामान्य बिजनेस ऑपरेशन्स और रिकवरी की कोशिशें अस्थायी रूप से ठप हो जाएंगी।
कंपनी का इतिहास और वित्तीय मुश्किलें
Supha Pharmachem, जो पहले Remedium Lifecare Limited के नाम से जानी जाती थी, पिछले कुछ समय से वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रही थी। 2025 की शुरुआत में, कंपनी का नाम Eli Lilly से जुड़े एक बड़े ऑर्डर से जोड़ा गया था, हालांकि बाद में इससे इनकार कर दिया गया, जिससे कंपनी के डिस्क्लोजर पर सवाल उठे। कंपनी SEBI की भी नजर में रही है, खासकर वित्तीय रिपोर्टिंग और निवेशकों से कम्युनिकेशन की विश्वसनीयता को लेकर। हाल के सालों में, कंपनी कमजोर रेवेन्यू ग्रोथ, भारी कर्ज और नेगेटिव कैश फ्लो से जूझ रही थी, जिसके कारण इसके शेयर अपने 52-वीक लो (52-week low) पर पहुँच गए थे। अप्रैल 2025 में किया गया राइट्स इश्यू (rights issue) कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए था, लेकिन आखिरकार कंपनी अपनी देनदारियों का भुगतान नहीं कर पाई और यह इंसॉल्वेंसी की कार्यवाही शुरू हुई।
मुख्य ऑपरेशनल बदलाव
NCLT के आदेश के साथ ही कई तत्काल बदलाव हुए हैं:
- Supha Pharmachem के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का अधिकार निलंबित कर दिया गया है। अब सारा मैनेजमेंट कंट्रोल नियुक्त IRP के पास होगा।
- इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 14 के तहत लागू मोरैटोरियम, कंपनी के खिलाफ किसी भी नए मुकदमे, संपत्ति हस्तांतरण या रिकवरी एक्शन को रोकता है।
- IRP कंपनी के अफेयर्स को संभालेगा, संपत्तियों को सुरक्षित रखेगा, और क्रेडिटर्स से क्लेम्स इकट्ठा करने में मदद करेगा।
- इसका मुख्य लक्ष्य एक व्यवहार्य रेसोल्यूशन प्लान खोजना है, जिसमें एक नया खरीदार मिलना, वित्तीय रीस्ट्रक्चरिंग या कंपनी की संपत्तियों का लिक्विडेशन शामिल हो सकता है।
आगे के संभावित जोखिम
मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू इरोज़न (value erosion) का बड़ा जोखिम है, क्योंकि कंपनी की संपत्तियों को कर्ज चुकाने में प्राथमिकता दी जाएगी। गलत दावे पेश करने वाले क्रेडिटर्स पर जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, मोरैटोरियम और मैनेजमेंट में बदलाव के कारण होने वाली ऑपरेशनल रुकावटें मौजूदा बिजनेस एक्टिविटीज और सप्लाई चेन्स को प्रभावित कर सकती हैं।
फार्मा सेक्टर में इंसॉल्वेंसी के मामले
Supha Pharmachem उन कुछ फार्मा कंपनियों में से है जो इंसॉल्वेंसी प्रोसेस से गुजर रही हैं। उदाहरण के लिए, Orchid Pharma Limited ने सफलतापूर्वक रीस्ट्रक्चरिंग की और इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू होने के लगभग 31 महीनों के भीतर मुनाफे में आ गई। Parental Drugs India Ltd. को CIRP के तहत एक रेसोल्यूशन प्लान के जरिए अधिग्रहित किया गया था। ये मामले बताते हैं कि रिकवरी संभव तो है, लेकिन इसमें अक्सर मूल शेयरहोल्डर्स के लिए काफी डाइल्यूशन (dilution) होता है।
