SEBI ने कॉर्पोरेट डेट बाज़ार को और मज़बूत बनाने के लिए 'लार्ज कॉर्पोरेट (LC)' का एक फ्रेमवर्क तैयार किया है।
इस फ्रेमवर्क के तहत, कंपनियों का मूल्यांकन उनके नेट वर्थ, मार्केट कैपिटलाइजेशन और डेट-टू-इक्विटी रेश्यो जैसे वित्तीय पैमानों के आधार पर किया जाता है। जो कंपनियां SEBI के तय बेंचमार्क को पूरा करती हैं, वे LC बन जाती हैं और डेट जारी करते समय उन्हें कुछ खास नियमों का पालन करना पड़ता है।
Shreyas Intermediates के LC श्रेणी से बाहर रहने का मतलब है कि कंपनी अपने डेट फंडरेज़िंग के लिए ज़्यादा आज़ादी (फ्लेक्सिबिलिटी) पाएगी। उसे कुछ खास ज़रूरतों से भी छूट मिलेगी, जैसे कि अपने डेट का एक हिस्सा लिस्टेड इंस्ट्रूमेंट्स के ज़रिए जुटाना। इससे फंड जुटाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
हालांकि, यह वर्गीकरण बाज़ार के लिए कंपनी की प्रोफाइल को भी दर्शाता है। यह अंतर इस बात पर असर डालता है कि बाज़ार कंपनी की विभिन्न डेट इंस्ट्रूमेंट्स और कैपिटल मार्केट्स तक पहुँच को कैसे देखता है।
आगे निवेशक Shreyas Intermediates की डेट जारी करने की भविष्य की योजनाओं पर नज़र रखेंगे। कंपनी के वित्तीय पैरामीटर्स में कोई भी बदलाव जो भविष्य में LC वर्गीकरण का कारण बन सकता है, या SEBI के मापदंडों में कोई भी बदलाव, महत्वपूर्ण होगा। कंपनी द्वारा डेट और शेयर जारी करके पूंजी जुटाने की समग्र रणनीति भी फोकस का एक मुख्य क्षेत्र बनी रहेगी।
