Sanstar Limited को फाइनेंशियल ईयर 2025 में बड़े झटके लगे हैं। कंपनी का रेवेन्यू 10.2% घटकर ₹971 करोड़ पर आ गया, जबकि नेट प्रॉफिट में 34.4% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले साल के मुकाबले घटकर ₹44 करोड़ रह गया।
इस मुश्किल दौर में, कंपनी के प्रोमोटर ग्रुप ने, Sambhav Starch Products Private Limited के ज़रिए, 20,000 शेयर खरीदे। इस खरीदारी के बाद प्रोमोटर ग्रुप की कंपनी में कुल हिस्सेदारी 5.89% से बढ़कर 5.90% हो गई है। हालांकि यह बढ़ोतरी मामूली है, लेकिन प्रोमोटर्स द्वारा लगातार शेयर खरीदना कंपनी के अंदरूनी विश्वास का संकेत दे सकता है।
कंपनी सिर्फ नतीजों में गिरावट से ही नहीं जूझ रही, बल्कि वर्किंग कैपिटल (Working Capital) का दबाव भी बढ़ रहा है। डेटर डेज (Debtor Days) 32.6 से बढ़कर 39.4 हो गए हैं, और कुल वर्किंग कैपिटल डेज FY24 के 36.6 दिनों से बढ़कर FY25 में 70.6 दिन हो गए हैं। इससे कंपनी की लिक्विडिटी (Liquidity) पर दबाव पड़ने की आशंका है।
Sanstar मुख्य रूप से मक्के (Maize) से बनने वाले प्लांट-बेस्ड स्पेशियलिटी प्रोडक्ट्स और इनग्रेडिएंट सॉल्यूशंस का निर्माण करती है। फिलहाल, कंपनी एक बड़े विस्तार प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसका लक्ष्य जुलाई 2025 तक अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को दोगुना करना है।
हालांकि, कंपनी के सामने कई रिस्क भी हैं। मक्के की कीमतों में उतार-चढ़ाव एक बड़ा कंसर्न है, क्योंकि रॉ मैटेरियल (Raw Material) पर ही कंपनी के कॉस्ट ऑफ सेल्स का 75-80% खर्च होता है। बड़े विस्तार प्रोजेक्ट में इम्प्लीमेंटेशन रिस्क (Implementation Risk) और लागत बढ़ने का खतरा भी है। साथ ही, Sanstar 76.95 के हाई P/E पर ट्रेड कर रही है, जो बताता है कि स्टॉक शायद महंगा हो सकता है।
बाजार में Sanstar के कॉम्पिटिटर्स (Competitors) में EID Parry (India) Ltd. और Avanti Feeds Ltd. जैसी भारतीय कंपनियां शामिल हैं, साथ ही Corbion जैसे ग्लोबल प्लेयर्स भी हैं। निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि प्रोमोटर्स की खरीदारी जारी रहती है या नहीं, विस्तार प्रोजेक्ट कितनी सफलतापूर्वक पूरा होता है, और कंपनी अपनी घटती रेवेन्यू और प्रॉफिट को कैसे रोकती है। वर्किंग कैपिटल के दबाव और रॉ मैटेरियल की कीमतों को मैनेज करना भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
