प्रमोटरों की हिस्सेदारी बिक्री का पूरा प्लान
Riddhi Siddhi Gluco Biols Ltd. के प्रमोटर्स कंपनी में 8.23 लाख शेयर बेच रहे हैं, जो उनकी कुल शेयर पूंजी का 11.55% है। यह बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से की जाएगी। इस कदम का मुख्य मकसद भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) यानी न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी के नियमों का पालन करना है।
SEBI के नियम और कंपनी की स्थिति
SEBI के नियमों के अनुसार, किसी भी लिस्टेड कंपनी में कम से कम 25% हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास होनी चाहिए, जबकि प्रमोटरों की हिस्सेदारी 75% से अधिक नहीं हो सकती। Riddhi Siddhi Gluco Biols, जो स्टार्च, लिक्विड ग्लूकोज और अन्य मक्के से बने उत्पाद बनाती है, को लंबे समय से इस पब्लिक फ्लोट के मुद्दे पर रेगुलेटरों का ध्यान मिला है। SEBI ने अगस्त 2021 में ही कंपनी को जून 2017 तक प्रमोटरों की हिस्सेदारी 75% तक कम करने का निर्देश दिया था, जो कंपनी उस समय पूरी नहीं कर पाई थी।
SAT के आदेश के बाद मिली राह
हाल ही में 9 मार्च, 2026 को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के एक आदेश के बाद, प्रमोटर्स अब इस ऐतिहासिक गैर-अनुपालन को ठीक करने के लिए शेयर बेचने में सक्षम हुए हैं। यह बिक्री कंपनी को अनिवार्य 25% सार्वजनिक फ्लोट के लक्ष्य के करीब लाने या उसे हासिल करने में मदद करेगी, जिससे उसकी अनुपालन स्थिति बेहतर होगी।
शेयर बिक्री का संभावित असर
- प्रमोटरों की सीधी हिस्सेदारी कम हो जाएगी।
- सफल बिक्री से कंपनी की कॉर्पोरेट गवर्नेंस प्रैक्टिसेज में निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।
- बाजार में ट्रेडिंग के लिए अधिक शेयर उपलब्ध होंगे, जिससे लिक्विडिटी (तरलता) बढ़ेगी।
संभावित जोखिम
- अगर OFS तय समय सीमा में पूरा नहीं होता है, तो SEBI आगे की कार्रवाई कर सकता है।
- बाजार की स्थितियां प्रमोटरों को उनके लक्षित मूल्य पर सभी शेयर बेचने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
- OFS से शेयरों की बढ़ी हुई सप्लाई से अल्पावधि में शेयर की कीमत पर दबाव आ सकता है।
प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
Riddhi Siddhi Gluco Biols स्टार्च और ग्लूकोज डेरिवेटिव्स के बाजार में काम करती है। इसके मुख्य प्रतिस्पर्धियों में K.P.R. Mill Limited (एग्रो डिवीजन) और India Glycols Limited शामिल हैं। हालांकि, यह शेयर बिक्री सामान्य रणनीतिक कदम के बजाय एक खास रेगुलेटरी जरूरत से प्रेरित है।
निवेशकों को क्या देखना है?
- OFS की तारीखें और प्रमोटरों द्वारा तय की गई प्राइस बैंड की पुष्टि।
- OFS के दौरान सफलतापूर्वक बेचे गए शेयरों की कुल मात्रा।
- अपडेटेड शेयरधारिता पैटर्न पर कंपनी के बाद के खुलासे।
- बढ़े हुए पब्लिक फ्लोट और OFS के बाद स्टॉक के प्रदर्शन पर बाजार की प्रतिक्रिया।
