सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: RCF पर ₹32.94 करोड़ की टैक्स डिमांड खारिज!
सर्वोच्च न्यायालय ने 24 मार्च 2026 को दिए अपने एक फैसले में, Rashtriya Chemicals and Fertilizers Limited (RCF) से जुड़ी एक्साइज ड्यूटी, ब्याज और जुर्माने से संबंधित सभी पिछली अदालती आदेशों को रद्द कर दिया है। इस मामले में कुल ₹32.94 करोड़ की मांग की गई थी।
यह महत्वपूर्ण फैसला 1996 से 2005 की अवधि के दौरान नैफ्था (Naphtha) के कथित डायवर्जन से जुड़े एक लंबे समय से चले आ रहे विवाद को हल करता है। RCF के लिए यह एक बड़ी जीत है, जिसने कंपनी को इस भारी 'legacy liability' या पुराने वित्तीय बोझ से मुक्त कर दिया है।
विवाद की जड़ें 2001 में सेंट्रल एक्साइज अधिकारियों द्वारा की गई जांच में थीं। अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि RCF द्वारा फर्टिलाइजर उत्पादन के लिए ड्यूटी-फ्री खरीदे गए नैफ्था का इस्तेमाल केमिकल और हेवी वॉटर प्लांट जैसी अन्य यूनिट्स में भी किया जा रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि एक्साइज नोटिफिकेशन में 'फॉर यूज' (for use) का मतलब 'इस्तेमाल के इरादे से' (intended for use) होना चाहिए, न कि 'वास्तविक इस्तेमाल' (actual use) या 'आकस्मिक इस्तेमाल' (incidental use)। कोर्ट ने यह भी माना कि RCF द्वारा खरीदा गया नैफ्था केवल फर्टिलाइजर उत्पादन के लिए भी पर्याप्त नहीं था, जिससे नैफ्था के डायवर्जन का आरोप कमज़ोर पड़ता है।
इस फैसले से RCF पर ₹32.94 करोड़ की देनदारी, जिसमें टैक्स, ब्याज और पेनल्टी शामिल थी, पूरी तरह से खत्म हो गई है। कंपनी के पिछले वित्तीय रिकॉर्ड भी अब इस सुलझे हुए मामले को दर्शाएंगे।
RCF भारत की प्रमुख सरकारी फर्टिलाइजर उत्पादक कंपनियों में से एक है और इस सेक्टर में यह Coromandel International, Chambal Fertilisers, National Fertilizers (NFL) और FACT जैसी कंपनियों के साथ प्रमुख खिलाड़ी है।
अब निवेशकों की नजर RCF की आगे की प्रोडक्शन एफिशिएंसी, इंडस्ट्रियल केमिकल्स डिवीजन के प्रदर्शन और मैनेजमेंट की भविष्य की ग्रोथ योजनाओं पर रहेगी।