क्या है पूरा ओपन ऑफर?
महेश अलाभाई ओडेद्रा और हिरन रामभाई ओडेद्रा नाम के एक्वायरर्स (Acquirers) ने नोबल पॉलिमर्स लिमिटेड (Noble Polymers Ltd.) के 26% इक्विटी शेयर्स (Equity Shares) खरीदने के लिए ओपन ऑफर शुरू किया है। इस ऑफर में प्रति शेयर ₹5 का भाव रखा गया है, और इसके तहत कुल ₹11.38 करोड़ जुटाए जाएंगे।
प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के बाद आया ऑफर
यह ओपन ऑफर उसी प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (Preferential Allotment) प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत ये एक्वायरर्स कंपनी के 22,76,400 इक्विटी शेयर्स और 60,00,000 कन्वर्टिबल वारंट्स (Convertible Warrants) खरीदने वाले थे। शेयर्स के लिए ₹11.38 करोड़ और वारंट्स के लिए ₹30 करोड़ का भुगतान किया जाएगा। नोबल पॉलिमर्स का बोर्ड 14 मई, 2026 को इस अलॉटमेंट पर विचार करेगा।
रिटेल निवेशकों के लिए एग्जिट का मौका
ओपन ऑफर के नियमों के अनुसार, एक्वायरर्स को 21 मई, 2026 तक ऑफर से जुड़ी विस्तृत पब्लिक स्टेटमेंट (Detailed Public Statement) जारी करनी होगी। ₹5 का यह ऑफर प्राइस मौजूदा रिटेल शेयरहोल्डर्स (Retail Shareholders) को कंपनी से बाहर निकलने (Exit Opportunity) का एक निश्चित मौका दे रहा है।
कंपनी का विवादास्पद इतिहास
नोबल पॉलिमर्स का अतीत काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है, खासकर अनुपालन (Compliance) के मामलों में। कंपनी 2018 से छह महीने से अधिक समय तक ट्रेडिंग सस्पेंशन (Trading Suspension) झेल चुकी है। स्टॉक एक्सचेंजों ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) में फेल होने, जैसे समय पर वित्तीय नतीजे पेश न करना और स्वतंत्र डायरेक्टरों (Independent Directors) की नियुक्ति न करने के कारण कंपनी को कंपलसरी डेलिस्टिंग (Compulsory Delisting) की प्रक्रिया में डाल दिया था। हालांकि, बाद में ट्रेडिंग फिर से शुरू हो गई, लेकिन यह इतिहास रेगुलेटरी एडहेरेंस (Regulatory Adherence) के साथ कंपनी की पिछली समस्याओं को दर्शाता है।
आगे क्या?
यह पूरा ट्रांजैक्शन कंपनी के मालिकाना हक (Ownership Structure) और कंट्रोल में बड़े बदलाव का संकेत देता है, जिससे भविष्य में इसकी स्ट्रेटेजिक दिशा (Strategic Direction) भी बदल सकती है। यह ध्यान दिया गया है कि ओपन ऑफर के मैनेजर ने कहा है कि जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से जुटाई गई है और इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
आगे जिन प्रमुख बातों पर नजर रखनी होगी, उनमें विस्तृत पब्लिक स्टेटमेंट का प्रकाशन, बोर्ड का प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट पर फैसला, रेगुलेटर्स की प्रतिक्रिया, ओपन ऑफर में मार्केट की भागीदारी और एक्वायरर्स की नोबल पॉलिमर्स के लिए भविष्य की योजनाएं शामिल हैं।
