ऑडिटर की गंभीर चिंताएं
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन के साथ-साथ, ऑडिटर (M/s Mayur Shah & Associates) की रिपोर्ट ने गवर्नेंस और पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि कंपनी ने ₹19.45 करोड़ जो प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (preferential allotment) के जरिए जुटाए थे, उनका इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल के बजाय इन्वेस्टमेंट के लिए किया गया, जो कि घोषित उद्देश्य के विपरीत था।
ऑडिटर को कंपनी के इन्वेस्टमेंट को वेरिफाई करने में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि उन्हें शेयर सर्टिफिकेट या डिमेट स्टेटमेंट जैसे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके अलावा, कंपनी डिविडेंड (Dividend) पेमेंट की देनदारियों का पालन नहीं कर रही है और कुछ डिविडेंड अभी भी बकाया हैं। वहीं, कई दूसरे पक्षों से डेबिट और क्रेडिट बैलेंस की कन्फर्मेशन मिलने में भी देरी हो रही है।
इन गंभीर चिंताओं के बीच, ऑडिटर M/s Mayur Shah & Associates ने 14 फरवरी 2026 को अपने पद से इस्तीफा देने की कोशिश की थी। हालांकि, कंपनी मैनेजमेंट ने उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है, जिससे स्थिति और अनिश्चित हो गई है।
रेवेन्यू में भारी गिरावट
इन गवर्नेंस मुद्दों के अलावा, कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के नतीजे भी बेहद चिंताजनक हैं। पूरे वित्तीय वर्ष के लिए रेवेन्यू पिछले साल के ₹8.35 करोड़ की तुलना में 69.51% गिरकर महज ₹2.55 करोड़ पर आ गया है। कंपनी ने इस अवधि में ₹0.04 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है।
हालांकि, चौथी तिमाही (Q4 FY26) में नेट लॉस घटकर ₹0.09 करोड़ रह गया, जो पिछली साल की समान तिमाही (Q4 FY25) में ₹0.49 करोड़ था। लेकिन, Q4 FY26 का स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹0.88 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि से 34.90% कम है।
आगे क्या?
रेवेन्यू में भारी गिरावट और ऑडिटर द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों के मद्देनजर, Natural Biocon के ऑपरेशंस और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग पर बारीक नजर रखी जाएगी। निवेशक मैनेजमेंट से इन चिंताओं पर जवाब और सुधारात्मक कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। SEBI या स्टॉक एक्सचेंज से संभावित रेगुलेटरी एक्शन के साथ-साथ कंपनी फंड के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण और ऑडिटर के मुद्दे को कैसे सुलझाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
