नतीजों में दिखा दमदार टर्नअराउंड
National Peroxide Ltd. ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने ₹11.04 करोड़ (₹1,103.71 लाख) का नेट प्रॉफिट (Profit After Tax) कमाया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) के ₹2.25 करोड़ (₹-224.64 लाख) के लॉस की तुलना में एक महत्वपूर्ण रिकवरी है।
कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी मामूली बढ़ा है। FY26 में ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹289.71 करोड़ (₹28,971.14 लाख) रहा, जबकि FY25 में यह ₹286.87 करोड़ (₹28,687.40 लाख) था। FY26 के लिए बेसिक ईपीएस (Earnings Per Share) ₹19.20 रहा।
डिविडेंड और लीडरशिप में बदलाव
कंपनी के बोर्ड ने ₹7 प्रति इक्विटी शेयर (फेस वैल्यू का 70%) का फाइनल डिविडेंड (Dividend) रिकमेंड किया है। इस रिकमेंडेशन को शेयरधारकों की मंजूरी के लिए आने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में पेश किया जाएगा।
मैनेजमेंट की बात करें तो, मिस्टर अमित गोरीवाले 31 मई, 2026 से इंटेरिम सीएफओ (CFO) और सीआरओ (CRO) के पद से इस्तीफा देंगे। उनकी जगह 1 जून, 2026 से मिस्टर चिराग कोठारी को नया सीएफओ और सीआरओ नियुक्त किया गया है।
निवेशकों के लिए अहम क्यों?
यह फाइनेंशियल रिकवरी निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह कंपनी की लॉस वाली स्थिति से प्रॉफिट में आने की क्षमता को दर्शाता है। सुझाया गया डिविडेंड भुगतान मैनेजमेंट के आत्मविश्वास और शेयरधारकों को कैपिटल रिटर्न करने की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
सीएफओ और सीआरओ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर यह बदलाव एक अहम घटना है। कंपनी के लिए वित्तीय अनुशासन और स्ट्रैटेजिक डायरेक्शन बनाए रखने के लिए एक स्मूथ हैंडओवर ज़रूरी होगा।
कंपनी और सेक्टर की पृष्ठभूमि
National Peroxide Ltd. महाराष्ट्र में अपनी फैसिलिटी से हाइड्रोजन पेरोक्साइड और सोडियम पेरोबोरेट का निर्माण करती है। केमिकल सेक्टर में आई वोलेटिलिटी, चुनौतीपूर्ण मार्केट कंडीशंस और इनपुट कॉस्ट के दबाव ने FY25 में कंपनी के लॉस में योगदान दिया था। FY26 के बेहतर नतीजों से पता चलता है कि कंपनी ने इन दिक्कतों का सफलतापूर्वक सामना किया है और अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ाया है।
आगे क्या देखना होगा?
शेयरधारक एजीएम में प्रस्तावित फाइनल डिविडेंड और डायरेक्टर्स को कमीशन के भुगतान पर वोट करेंगे। निवेशक चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और चीफ रिस्क ऑफिसर के पद पर होने वाले बदलावों पर भी बारीकी से नजर रखेंगे। सबसे अहम बात यह है कि कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ में सुधार हुआ है।
