Q4 और पूरे साल के नतीजे
कंपनी के नतीजे बताते हैं कि चौथी तिमाही (Q4 FY26) में कुल रेवेन्यू 18.12% बढ़कर ₹87.06 करोड़ पर पहुंच गया। इस तिमाही में कंपनी ने ₹7.93 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि में हुए ₹6.49 करोड़ के घाटे से बिलकुल उलट है।
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 की बात करें तो, कंपनी का रेवेन्यू 1.48% बढ़कर ₹295.68 करोड़ रहा। इस दौरान, कंपनी ने ₹11.04 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में ₹2.25 करोड़ का घाटा था।
क्यों मायने रखता है यह टर्नअराउंड?
यह परफॉरमेंस National Peroxide Ltd के लिए एक बड़ा पॉज़िटिव संकेत है। कंपनी ने पिछला घाटा रिकवर कर लिया है और अब मुनाफे में है। इसके अलावा, कंपनी का नॉन-करंट बोरिंग (Non-current Borrowings) भी घटकर शून्य हो गया है, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट और मज़बूत हुई है।
1954 में स्थापित National Peroxide Ltd, भारत की हाइड्रोजन पेरॉक्साइड (Hydrogen Peroxide - H₂O₂) की सबसे बड़ी निर्माता है, जिसकी क्षमता 150,000 MTPA है। कंपनी पेरएसिटिक एसिड (Peracetic Acid) और कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस (Compressed Hydrogen Gas) भी बनाती है।
निवेशकों के लिए मुख्य वॉचपॉइंट्स
जहां एक ओर ऑडिटर (Auditor) ने रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं जताई है, वहीं एक 'Emphasis of Matter' नोट में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स को ₹17 लाख के कमीशन भुगतान का ज़िक्र है। यह रकम कंपनीज़ एक्ट, 2013 की धारा 197 के तहत तय सीमा से ज़्यादा है और इसके लिए शेयरधारकों की मंज़ूरी ज़रूरी होगी। इसके अलावा, जून 2026 में कंपनी के नए चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) का कार्यभार संभालना भी निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट है।
National Peroxide Ltd भारतीय हाइड्रोजन पेरॉक्साइड मार्केट में कई बड़े खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है, जिनमें Gujarat Alkalies and Chemical Limited (GACL), Meghmani Finechem Limited (MFL), Aditya Birla Chemicals और Indian Peroxide Limited शामिल हैं।
निवेशक अब इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या शेयरधारक प्रस्तावित डायरेक्टर कमीशन को मंज़ूरी देते हैं। नए CFO का कंपनी की स्ट्रैटेजी में क्या योगदान होगा, यह भी देखना अहम होगा। साथ ही, कंपनी प्रॉफिट और रेवेन्यू ग्रोथ की गति को बनाए रख पाती है या नहीं, यह आने वाले तिमाहियों में पता चलेगा।
