कस्टम्स ड्यूटी मामले में Manali Petro की शानदार जीत!
इस फैसले के बाद, Manali Petrochemicals अब इस मामले के लिए पहले से बनाए गए प्रोविजन (Provisions) को राइट-बैक (Write-back) कर सकेगी, जिससे सीधे तौर पर कंपनी की बैलेंस शीट को फायदा होगा।
क्या था मामला?
यह पूरा मामला इंपोर्ट किए गए क्विकलाइम (Quicklime) के क्लासिफिकेशन (Classification) से जुड़ा था। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) का कहना था कि इंपोर्टेड मटेरियल में 98% या उससे अधिक कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) की मात्रा है, इसलिए इस पर ज़्यादा कस्टम्स ड्यूटी लगनी चाहिए। लेकिन Manali Petrochemicals ने इसका जोरदार विरोध करते हुए कहा कि CaO की शुद्धता 91% से 95% के बीच है। कंपनी के मुताबिक, इस शुद्धता स्तर के कारण यह एक अलग टैरिफ आइटम (Tariff Item) के तहत आता है, जिस पर कम ड्यूटी लागू होती है।
CESTAT का फैसला
CESTAT ने Manali Petrochemicals के तर्कों को सही ठहराया और फैसला सुनाया कि इंपोर्टेड क्विकलाइम की शुद्धता 98% की उस सीमा को पार नहीं करती है, जिसे DRI उच्च ड्यूटी क्लासिफिकेशन के लिए लक्षित कर रहा था। यह निर्णय पिछले ट्रिब्यूनल रूलिंग्स के अनुरूप है, जिनमें शुद्धता सामग्री को क्लासिफिकेशन के लिए एक निर्णायक कारक माना गया है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति
फाइनेंशियल ईयर 2024-25 (FY25) के लिए, Manali Petrochemicals ने ₹921.63 करोड़ की कुल आय पर ₹29 करोड़ का कंसोलिडेटेड मुनाफा (Consolidated Profit After Tax) दर्ज किया था। इस तरह के सफल रेगुलेटरी जीतें निवेशकों का भरोसा बढ़ाती हैं और कंपनी के मैनेजमेंट पर विश्वास मजबूत करती हैं।
अन्य मुद्दे
यह कस्टम्स ड्यूटी मामला सुलझने के साथ-साथ, कंपनी फ्लेक्सिबल स्लैबस्टॉक पॉलीओल (Flexible Slabstock Polyol) इंपोर्ट पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-dumping Duty) जांच और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से जुड़े पर्यावरण अनुपालन (Environmental Compliance) जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही है।
Manali Petrochemicals, Kothari Petrochemicals Ltd., Panama Petrochem Ltd., और Tamilnadu Petroproducts Ltd. जैसी कंपनियों के साथ कॉम्पिटिटिव पेट्रोकेमिकल सेक्टर में ऑपरेट करती है, जहां कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बदलते रेगुलेटरी फ्रेमवर्क आम चुनौतियां हैं।
