टैक्स का ₹35.67 करोड़ का डिमांड रद्द
Refex Industries लिमिटेड के लिए यह एक बड़ी राहत है। मद्रास हाई कोर्ट ने कंपनी के खिलाफ असेसमेंट ईयर 2016-17 के लिए जारी किए गए ₹35.67 करोड़ (यानी ₹3,567.22 लाख) के इनकम टैक्स डिमांड को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
यह डिमांड डिप्टी कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (Deputy Commissioner of Income Tax) द्वारा मई 2023 में जारी किए गए एक असेसमेंट ऑर्डर (Assessment Order) से जुड़ी थी। Refex Industries ने इस ऑर्डर को मद्रास हाई कोर्ट में रिट पिटीशन (Writ Petition) के जरिए चुनौती दी थी। कंपनी का तर्क था कि उन्हें सुनवाई का उचित अवसर (Reasonable Opportunity) नहीं दिया गया और टैक्स असेसमेंट प्रक्रिया के दौरान प्रक्रियात्मक अनियमितताएं (Procedural Irregularities) हुईं।
कंपनी को 28 अप्रैल, 2026 को यह अहम फैसला मिला, जिसने असेसमेंट ऑर्डर को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
कोर्ट के फैसले का महत्व
इस फैसले से Refex Industries पर लटक रही ₹35.67 करोड़ की एक बड़ी वित्तीय देनदारी (Financial Liability) खत्म हो गई है। यह अदालती जीत टैक्स मामलों में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता (Procedural Fairness) पर कंपनी के रुख को मजबूती देती है और संबंधित असेसमेंट ईयर के लिए इस टैक्स विवाद को समाप्त करती है।
टैक्स जांच का बैकग्राउंड
Refex Industries एक विविध समूह है जो रेफ्रिजरेंट गैस (Refrigerant Gases), ऐश हैंडलिंग (Ash Handling), सोलर पावर (Solar Power) और ग्रीन मोबिलिटी (Green Mobility) जैसे क्षेत्रों में काम करता है। कंपनी पहले भी टैक्स जांच के दायरे में रही है। दिसंबर 2025 में, इनकम टैक्स विभाग ने कंपनी के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन (Search Operations) चलाया था। उस समय वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे, लेकिन Refex Industries ने स्टॉक एक्सचेंजों को दिए बयानों में इन दावों को भ्रामक और बेबुनियाद बताते हुए कहा था कि उनके व्यावसायिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ा है।
इसी तरह के कई मामलों में, मद्रास हाई कोर्ट ने प्रक्रियात्मक खामियों या सुनवाई से इनकार के कारण टैक्स असेसमेंट ऑर्डर रद्द किए हैं, जो उचित प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करते हैं।
अब आगे क्या?
- Refex Industries अब असेसमेंट ईयर 2016-17 के लिए ₹35.67 करोड़ के इस इनकम टैक्स के लिए उत्तरदायी (Liable) नहीं होगी।
- कंपनी की टैक्स डिमांड के खिलाफ कानूनी चुनौती सफल रही है।
- इस विशेष टैक्स डिमांड के लिए कंपनी द्वारा किए गए किसी भी फाइनैंशिपल प्रोविजन्स (Financial Provisions) को अब एडजस्ट किया जा सकता है।
