मुनाफे में 'खास' योगदान!
JSW Dulux का FY26 का मुनाफा ₹1,973.80 करोड़ रहा, जो कि उसके ऑपरेशन्स से हुई कमाई ₹3,599.2 करोड़ पर आधारित है. हालांकि, इस बड़े मुनाफे में 'एक्सेप्शनल आइटम्स' का बड़ा हाथ रहा, जिसकी कुल रकम ₹1,845.90 करोड़ थी. इन खास आइटम्स का मुख्य कारण नए लेबर कोड्स का लागू होना बताया जा रहा है.
अगर इन एक्सेप्शनल आइटम्स को अलग कर दिया जाए, तो साल का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (Profit Before Tax) ₹453.3 करोड़ रहा. पिछले साल, FY25 में यह आंकड़ा ₹452.7 करोड़ था, जो दर्शाता है कि कोर बिजनेस में स्थिरता बनी हुई है.
डिविडेंड और ऑडिटर में बदलाव
कंपनी के डायरेक्टर्स बोर्ड ने शेयरधारकों की मंजूरी के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹50 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) का प्रस्ताव रखा है. यह 72वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में तय होगा.
कॉर्पोरेट गवर्नेंस को और मजबूत करने के लिए, कंपनी ने नए वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors) के तौर पर Deloitte Haskins & Sells LLP को अगले पांच साल के लिए प्रस्तावित किया है. ये फर्म मौजूदा ऑडिटर Price Waterhouse Chartered Accountants LLP की जगह लेगी.
इसके अलावा, Chandra Wadhwa & Co. को FY26-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर (Cost Auditor) नियुक्त किया गया है और Ms. Ritika Chopra ने एचआर हेड (Head of HR) के तौर पर जॉइन किया है.
कंपनी की पोजीशन और आगे क्या?
JSW Dulux भारत के पेंट सेक्टर में एक जाना-माना नाम है. यह JSW ग्रुप और AkzoNobel का एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) रहा है. AkzoNobel अपने पेंट और कोटिंग्स बिजनेस से ग्लोबल लेवल पर बाहर निकलने की रणनीति बना रही है, जिसके चलते JSW Dulux में उसकी हिस्सेदारी कम होने की उम्मीद है. इससे JSW ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़ सकती है.
निवेशकों के लिए, ₹50 का डिविडेंड एक अहम खबर है. वहीं, नए ऑडिटर की नियुक्ति से वित्तीय रिपोर्टिंग में बदलाव आ सकते हैं. नए लेबर कोड्स का लॉन्ग-टर्म असर और एक्सेप्शनल आइटम्स के बाद कंपनी की असली ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर नजर रहेगी. JSW ग्रुप की बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए कंपनी की भविष्य की रणनीतियां भी महत्वपूर्ण होंगी.
