FY26 में India Glycols का दमदार प्रदर्शन
वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक India Glycols ने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 11.8% की बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹4,211 करोड़ रहा। वहीं, कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 26.8% बढ़कर ₹293 करोड़ हो गया। यह कंपनी के लिए एक मजबूत वित्तीय वर्ष साबित हुआ है।
चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे भी उत्साहजनक रहे। इस तिमाही में रेवेन्यू 13.1% बढ़कर ₹976 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि PAT में 35.7% का इजाफा देखा गया और यह ₹87 करोड़ रहा। कंसोलिडेटेड EBITDA में भी 24.5% की वृद्धि के साथ यह ₹654 करोड़ पर रहा। Q4 FY26 में EBITDA 13.3% बढ़कर ₹167 करोड़ रहा।
डी-मर्जर की योजना को मिली हरी झंडी
वित्तीय नतीजों के साथ-साथ, India Glycols अपने पॉटेबल स्पिरिट्स (Potable Spirits), बायो-फ्यूल (Bio-fuel) और बायो-फार्मा (Bio-pharma) व्यवसायों को अलग-अलग कंपनियों में डी-मर्ज करने की महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (Corporate Restructuring) प्रक्रिया पर आगे बढ़ रही है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने इस स्कीम को स्वीकार कर लिया है। इस योजना पर अगली सुनवाई 21 मई 2026 को होनी है।
इस डी-मर्जर का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक बिजनेस सेगमेंट के लिए अलग, केंद्रित कंपनियां बनाना है। उम्मीद है कि इससे हर कंपनी का अपना विशेष मैनेजमेंट, अलग रणनीति और बेहतर वैल्यूएशन (Valuation) मिलेगा, जिससे निवेशक हर कारोबार का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन कर सकेंगे। पुनर्गठन के बाद, प्रमोटर ग्रुप की प्रत्येक नई इकाई में लगभग 59.63% हिस्सेदारी रहने की उम्मीद है।
एनचर (Ennature) मार्जिन पर दबाव और बाजार की चिंताएं
हालांकि, कंपनी के एनचर बायोफार्मा सेगमेंट के EBITDA मार्जिन पर कुछ दबाव देखा जा रहा है। यह निकोटीन (Nicotine) की बिक्री में कमी और ग्लोरियोसा सीड (Gloriosa seeds) की बढ़ती लागत के कारण हुआ है। इसके अलावा, वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) स्थितियों के कारण कुछ अंतिम-उपयोग वाले बाजारों (End-user markets) में मांग में नरमी भी देखी जा रही है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को अब 21 मई 2026 को होने वाली NCLT की सुनवाई के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी होगी। डी-मर्जर योजना की मंजूरी और इसके बाद नई कंपनियों के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी।