EID Parry: घाटे वाले शुगर यूनिट पर गिरी गाज! कंपनी ने बुक किया **₹655 करोड़** का प्रोविज़न

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
EID Parry: घाटे वाले शुगर यूनिट पर गिरी गाज! कंपनी ने बुक किया **₹655 करोड़** का प्रोविज़न
Overview

EID Parry के बोर्ड ने अपनी एक पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी, Parry Sugars Refinery India Private Limited (PSRIPL) को **31 मार्च 2026** से बंद करने की मंजूरी दे दी है। यह कदम घाटे वाले बिजनेस से बाहर निकलने की रणनीति का हिस्सा है, जो लंबे समय से ऑपरेशनल और फाइनेंशियल दिक्कतों का सामना कर रहा था। EID Parry, PSRIPL की देनदारियों को संभालने के लिए **₹740 करोड़** तक की मदद देगी और एक बड़ा प्रोविज़न बुक करने की उम्मीद है।

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घाटे वाले शुगर यूनिट पर भारी प्रोविज़न

EID Parry के डायरेक्टर्स बोर्ड ने अपनी पूरी तरह से सब्सिडियरी, Parry Sugars Refinery India Private Limited (PSRIPL) को बंद करने का फैसला पक्का कर लिया है। यह यूनिट 31 मार्च 2026 से अपना कामकाज बंद कर देगी। यह फैसला PSRIPL की लगातार बनी हुई ऑपरेशनल और फाइनेंशियल मुश्किलों के चलते लिया गया है, जिसकी वजह से यह बिजनेस टिकाऊ नहीं रह पाया है।

मुख्य कारणों में नेचुरल गैस की सप्लाई की कमी और प्रोडक्ट्स के गिरते मार्केट प्राइस शामिल हैं। PSRIPL की मौजूदा लायबिलिटीज़ को निपटाने के लिए, EID Parry ₹740 करोड़ तक का फाइनेंशियल सपोर्ट देगी। इसमें ₹610 करोड़ का इन्वेस्टमेंट और ₹130 करोड़ का इंटर-कॉर्पोरेट लोन शामिल है। कंपनी इस बंद की वजह से करीब ₹655 करोड़ का बड़ा प्रोविज़न और ₹46 करोड़ का इम्पिअरमेंट चार्ज बुक करने का अनुमान लगा रही है।

रणनीतिक बदलाव का असर

इस कदम से EID Parry लगातार घाटे में चल रहे अपने बिजनेस सेगमेंट से बाहर निकल रही है। कंपनी का लक्ष्य अपने ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करना और रिसोर्सेज को ज्यादा प्रॉफिटेबल वेंचर्स की ओर लगाना है। फाइनेंशियल सपोर्ट पैकेज, PSRIPL के कर्जों को व्यवस्थित तरीके से निपटाने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दिखाता है। इस बंद से EID Parry पर पड़ने वाले फाइनेंशियल इंपैक्ट को प्रोविज़न से समझा जा सकता है।

PSRIPL की मुश्किलें

Parry Sugars Refinery India Private Limited (PSRIPL) पर 31 मार्च 2025 तक ₹1,406 करोड़ का भारी घाटा जमा हो चुका था। लगभग दो दशक से काम कर रही PSRIPL ने मार्केट की गंभीर चुनौतियों का सामना किया है। इसमें ग्लोबल व्हाइट प्रीमियम में गिरावट और सप्लाई का बढ़ना शामिल है, जिसने इसकी प्रॉफिटेबिलिटी को काफी कम कर दिया है। इसके चलते सब्सिडियरी के रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी कमी आई है।

कंपनी की बड़ी रणनीति

मुराली ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी EID Parry, जिसका इतिहास 1788 तक जाता है, एक बड़ा स्ट्रेटेजिक बदलाव कर रही है। कंपनी नॉन-शुगर रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए बायोफ्यूल्स और कंज्यूमर सेगमेंट्स में कैपिटल एलोकेशन बढ़ा रही है। इस डाइवर्सिफिकेशन का मकसद शुगर सेक्टर पर पड़ने वाले दबाव, जैसे अप्रत्याशित मौसम पैटर्न और रेगुलेटरी बदलावों के खिलाफ मजबूती बनाना है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

घाटे वाले PSRIPL से बाहर निकलने से EID Parry के ओवरऑल फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर पड़ रहा भारी बोझ कम होगा। शेयरहोल्डर्स को प्रोविज़न और इम्पिअरमेंट चार्ज से होने वाले एक-टाइम फाइनेंशियल इंपैक्ट की उम्मीद करनी चाहिए। कंपनी अब अपने रिसोर्सेज और मैनेजमेंट फोकस को बायोफ्यूल्स और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसे ग्रोथ एरिया की ओर मोड़ देगी। PSRIPL की बाकी देनदारियों को निपटाना एक अहम काम होगा।

संभावित जोखिम

EID Parry को PSRIPL की अनुमानित ₹740 करोड़ की लायबिलिटीज़, खासकर बैंक बोरिंग्स को सेटल करना होगा। एसेट रियलाइजेशन से किसी भी कमी का असर EID Parry पर पड़ सकता है। फाइनल फाइनेंशियल इंपैक्ट, फिलहाल अनुमानित ₹655 करोड़ के प्रोविज़न और ₹46 करोड़ के इम्पिअरमेंट चार्ज से अलग भी हो सकता है। साथ ही, ₹130 करोड़ का इंटर-कॉर्पोरेट लोन एग्रीमेंट अभी एग्जीक्यूट होना बाकी है। EID Parry के शुगर सेगमेंट पर ऐतिहासिक रूप से प्रतिकूल मौसम, रेगुलेटरी इश्यूज और इथेनॉल प्रोडक्शन पर लगी पाबंदियों का असर पड़ा है।

इंडस्ट्री का संदर्भ

EID Parry, Balrampur Chini Mills, Triveni Engineering & Industries, और Dhampur Sugar Mills जैसी कंपनियों के साथ इंडियन शुगर इंडस्ट्री में काम करती है। यह सेक्टर फिलहाल कमजोर प्राइसिंग, एक्सपोर्ट पर पाबंदियों और इथेनॉल ब्लेंडिंग मैंडेट्स को लेकर अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। जबकि कई शुगर स्टॉक्स प्रभावित हुए हैं, EID Parry और Balrampur Chini जैसे साथियों ने इथेनॉल और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में डाइवर्सिफाई करके और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाकर लचीलापन दिखाया है।

फाइनेंशियल स्नैपशॉट

FY25 में, PSRIPL ने लगभग ₹4,262.45 करोड़ का टर्नओवर रिपोर्ट किया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर से 3% कम था। EID Parry ने खुद FY25 में ₹428 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया, जिसका बड़ा कारण अपनी शुगर रिफाइनरी सब्सिडियरी से जुड़ा ₹427 करोड़ का एक-टाइम इम्पिअरमेंट चार्ज था।

आगे क्या?

निवेशक EID Parry के ₹610 करोड़ के इन्वेस्टमेंट और PSRIPL को ₹130 करोड़ के इंटर-कॉर्पोरेट लोन के एग्जीक्यूशन पर नज़र रखेंगे, जो 31 मई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। PSRIPL की एसेट रियलाइजेशन की असलियत और बैंक बोरिंग्स को सेटल करने में उसकी प्रभावशीलता को ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा। EID Parry के आने वाले फाइनेंशियल रिजल्ट्स प्रोविज़न के इंपैक्ट और उसकी डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी की प्रगति को दिखाएंगे। इंडियन शुगर सेक्टर के बड़े डेवलपमेंट पर भी नजर रखनी होगी।

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