DIC India पर GST का शिकंजा!
DIC India Limited को एक बड़ा झटका लगा है, कंपनी को ₹2,81,472 का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) डिमांड ऑर्डर मिला है। इस रकम में ₹1,40,736 का टैक्स और उतनी ही पेनल्टी शामिल है। यह डिमांड 2019-20 से 2021-22 तक के फाइनेंशियल ईयर के दौरान डुप्लीकेट E-Way Bills जारी करने के आरोपों की वजह से आई है।
हालांकि, कंपनी ने यह साफ कर दिया है कि इस ऑर्डर का उसके फाइनेंसियल या ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। यह अमाउंट छोटा लग सकता है, लेकिन यह तब आया है जब DIC India को हाल के सालों में कई टैक्स नोटिस मिले हैं। कंपनी बार-बार 'कोई खास असर नहीं' होने की बात कह रही है, जिससे यह पता चलता है कि या तो वे अपने इंटरनल रिव्यू पर भरोसा कर रहे हैं या अपील प्रोसेस पर।
पहले भी हुए हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब DIC India को इस तरह के टैक्स मामलों का सामना करना पड़ा है। पहले भी कंपनी को GST डिमांड नोटिस मिले हैं, जिनमें इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के गलत इस्तेमाल, R&D फीस की रिकवरी जैसे मामले शामिल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, FY 2021-22 के लिए एक GST डिमांड को कंपनी के प्रेजेंटेशन के बाद ₹6.71 करोड़ से घटाकर ₹3.81 लाख कर दिया गया था। इतना ही नहीं, कंपनी ने SEBI के साथ भी एक मामले को ₹34.32 लाख में सेटल किया था, जो डिस्क्लोजर में कमी से जुड़ा था।
आगे क्या होगा?
अब DIC India अपने कंसल्टेंट्स के साथ इस GST डिमांड ऑर्डर की विस्तार से समीक्षा करेगी और आगे की कार्रवाई पर फैसला लेगी। इस ऑर्डर की वजह से कंपनी के फाइनेंसियल ऑपरेशंस या रिपोर्टिंग में तुरंत कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है। सबसे बड़ा रिस्क यह है कि अगर यह डिमांड बरकरार रहती है, तो कंपनी के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है, भले ही अभी कंपनी इसे मामूली मान रही है। बार-बार ऐसे मामले सामने आना कहीं न कहीं कंप्लायंस (Compliance) से जुड़ी बड़ी चुनौतियों की ओर इशारा कर सकता है।
DIC India प्रिंटिंग इंक और स्पेशलटी केमिकल्स सेक्टर में काम करती है। इस सेक्टर में Siegwerk, Toyo Ink SC Holdings, और Hubergroup जैसी कंपनियां भी हैं। निवेशक इस मामले में DIC India की आगे की कार्रवाई पर नजर रखेंगे।