AGM में क्या हुए बड़े फैसले?
23 मार्च 2026 को हुई इस वर्चुअल AGM में, शेयरधारकों ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए कंपनी के ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट पर अपनी मुहर लगा दी। इसके साथ ही, कंपनी ने ₹3 प्रति इक्विटी शेयर के अंतिम डिविडेंड को मंजूरी दी, जो योग्य शेयरधारकों को बांटा जाएगा।
बोर्ड की स्थिरता को बनाए रखने के लिए, मिस्टर हयातो काशिवागी को नॉन-एग्जीक्यूटिव नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया है। वहीं, मिस्टर अदनान वजहत अहमद 1 अप्रैल 2026 से तीन साल के नए कार्यकाल के लिए नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर का पद संभालेंगे।
इसके अलावा, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए M/s. चंद्रा वाधवा एंड कंपनी (M/s. Chandra Wadhwa & Co.) को कॉस्ट ऑडिटर (Cost Auditor) के रूप में नियुक्त किया है।
निवेशकों के लिए AGM का महत्व
AGM में फाइनेंशियल रिजल्ट्स की मंजूरी कंपनी के पिछले साल के प्रदर्शन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानकों के अनुपालन की पुष्टि करती है। डिविडेंड का भुगतान शेयरधारकों को सीधा रिटर्न देता है, जो निवेश का एक अहम पहलू है। अनुभवी डायरेक्टर्स की पुनः नियुक्ति से कंपनी की रणनीति और संचालन में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है।
कंपनी का बैकग्राउंड और रेगुलेटरी फोकस
DIC India, जापान की DIC Corporation की सब्सिडियरी है और भारत में प्रिंटिंग इंक और संबंधित उत्पादों की एक प्रमुख कंपनी है। यह पैकेजिंग और पब्लिशिंग जैसे सेक्टरों को सेवाएं देती है। कंपनी का शेयरधारकों को रिटर्न देने का इतिहास रहा है। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024 के लिए ₹4 प्रति शेयर और उससे पहले ₹3 प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश की गई थी।
निवेशक कंपनी के हालिया रेगुलेटरी इतिहास पर भी नजर रख रहे हैं। DIC India ने पहले SEBI के साथ डिस्क्लोजर लैप्स (disclosure lapses) से जुड़े एक मामले को ₹34.32 लाख में निपटाया था। इसके अलावा, कंपनी को टैक्स से जुड़े मामलों का भी सामना करना पड़ा है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए इनकम टैक्स का एक ड्राफ्ट ऑर्डर था जिसमें ₹3.84 करोड़ के समायोजन का प्रस्ताव था। वहीं, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की मांग को ₹6.71 करोड़ से घटाकर ₹3.81 लाख कर दिया गया था।
आगे क्या देखना होगा?
AGM के बाद, निवेशक वोटिंग नतीजों और स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के औपचारिक सबमिशन का इंतजार करेंगे। डिविडेंड भुगतान की समय-सारणी भी एक अहम अपडेट होगी। कंपनी के टैक्स और रेगुलेटरी मामलों में आगे की प्रगति पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
