Chemkart India Ltd ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) से जुटाए गए फंड के इस्तेमाल पर एक अहम रिपोर्ट जारी की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के दौरान अपने मैन्युफैक्चरिंग कैपेक्स (Capex) के लिए ₹3.12 करोड़ और खर्च किए, जिससे इस मद में कुल इस्तेमाल ₹4.57 करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, IPO से मिले ₹20 करोड़ का पूरा कर्ज भी चुका दिया गया है।
इसके अलावा, IPO से जुड़े खर्चों पर कुल ₹9.08 करोड़ का भुगतान किया गया है।
एक खास बात जनरल कॉर्पोरेट पर्पस (GCP) के खर्च में देखी गई है। ऑफर डॉक्यूमेंट में जहां GCP के लिए ₹0.00 इस्तेमाल दिखाया गया था, वहीं प्रगति रिपोर्ट के अनुसार ₹0.46 करोड़ खर्च हुए हैं। इस कारण GCP के लिए ₹-0.19 करोड़ की अनयूटिलाइज्ड (unutilized) राशि बची है।
यह रिपोर्ट निवेशकों को पारदर्शिता प्रदान करती है कि Chemkart India अपने IPO कैपिटल का उपयोग कैसे कर रही है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार और कर्ज कम करना जैसे मुख्य उद्देश्य शामिल हैं। GCP फंड के इस्तेमाल में देखी गई यह छोटी सी भिन्नता कंपनी से स्पष्टीकरण की मांग करती है।
Chemkart India का IPO मैन्युफैक्चरिंग सुधारों को फाइनेंस करने और बकाया कर्ज को कम करने के लिए लाया गया था। कंपनी फार्मास्युटिकल इंटरमीडिएट्स और स्पेशलिटी केमिकल्स सेक्टर में काम करती है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश की आवश्यकता होती है। इसके प्रतिस्पर्धियों Ami Organics Ltd और Tatva Chintan Pharma Chem Ltd जैसे खिलाड़ी भी क्षमता विस्तार में भारी निवेश करते हैं।
कंपनी के लिए मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का विस्तार योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है। IPO फंड का उपयोग करके कर्ज का सफल पुनर्भुगतान एक बड़ी उपलब्धि है। निवेशक GCP खर्च में हुई भिन्नता को लेकर कंपनी के औपचारिक स्पष्टीकरण का इंतजार करेंगे।
