फंड्स का इस्तेमाल और जर्मनी में मुश्किल
Borosil Renewables ने 31 मार्च, 2026 तक अपने हालिया प्रेफरेंशियल इश्यू से ₹235.14 करोड़ का इस्तेमाल किया है। यह राशि मुख्य तौर पर कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) और लोन चुकाने के लिए थी। कंपनी ने यह जानकारी अपनी मॉनिटरिंग एजेंसी रिपोर्ट्स में दी है। CARE रेटिंग्स के मुताबिक, यह इश्यू थोड़ा अंडरसब्सक्राइब (Undersubscribed) रहा था, जिसमें ₹376.02 करोड़ के इश्यू साइज के मुकाबले ₹371.49 करोड़ ही जुटाए जा सके। वहीं, ICRA ने प्रेफरेंशियल इश्यू से कुल ₹517.66 करोड़ नेट प्रोसीड्स (Net Proceeds) की रिपोर्ट दी थी।
इन फंड्स का इस्तेमाल ₹68.72 करोड़ कैपिटल स्पेंडिंग के लिए, ₹185.00 करोड़ लोन रिपेमेंट/SBLC (Standby Letter of Credit) के लिए और ₹10.00 करोड़ जनरल कॉर्पोरेट पर्पस (General Corporate Purposes) के लिए किया गया।
सब्सिडियरी पर इन्सॉल्वेंसी का खतरा
वहीं, दूसरी तरफ, कंपनी के लिए एक बड़ी चिंता उसकी जर्मन स्टेप-डाउन सब्सिडियरी GMB Glasmanufaktur Brandenburg GmbH को लेकर है। यह कंपनी लिक्विडिटी की कमी और कठिन मार्केट कंडिशन्स के कारण जर्मनी में इन्सॉल्वेंसी (Insolvency) फाइल करने की कगार पर है। इस स्थिति से कंपनी की यूरोपियन विस्तार योजनाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कंपनी का बैकग्राउंड और बाजार की स्थिति
Borosil Renewables भारत की एकमात्र इंटीग्रेटेड सोलर ग्लास मैन्युफैक्चरर (Integrated Solar Glass Manufacturer) है, जो तेजी से बढ़ते हुए सोलर पीवी सेक्टर (Solar PV Sector) के लिए बेहद ज़रूरी है। कंपनी ने हाल के वर्षों में अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी (Production Capacity) बढ़ाई है, जिसमें अगस्त 2022 में ₹500 करोड़ का QIP (Qualified Institutional Placement) भी शामिल था। अपनी सब्सिडियरी, GMB Glasmanufaktur Brandenburg GmbH, के ज़रिए कंपनी ने यूरोप में मैन्युफैक्चरिंग फुटप्रिंट (Manufacturing Footprint) बनाने का लक्ष्य रखा था।
आगे क्या?
शेयरहोल्डर्स (Shareholders) अब कोर मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी में जारी निवेश पर नज़र रखेंगे। लोन लायबिलिटीज (Loan Liabilities) में कमी से फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) कम हो सकती है। हालांकि, जर्मन सब्सिडियरी की इन्सॉल्वेंसी से निपटना कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो उसके यूरोपियन मार्केट एक्सेस (European Market Access) को प्रभावित कर सकता है या फिर रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) की ज़रूरत पैदा कर सकता है। प्रेफरेंशियल इश्यू के ₹282.52 करोड़ के अन-यूटिलाइज्ड फंड्स (Unutilised Funds) अभी भी भविष्य के उपयोग के लिए उपलब्ध हैं।
