Balkrishna Paper Mills Ltd. ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए रियल एस्टेट डेवलपमेंट और उससे जुड़े कामों में उतरने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने इस बड़े कदम के लिए हरी झंडी दे दी है, हालांकि इस नए वेंचर में कितना निवेश होगा, यह प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी स्टडी और मार्केट एनालिसिस के बाद तय किया जाएगा।
इस नए कारोबार के साथ-साथ, कंपनी ने अपनी वर्किंग कैपिटल और दूसरी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एक खास फंडिंग मैकेनिज्म भी तैयार किया है। Balkrishna Paper Mills ₹50 करोड़ तक का इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट (ICD) हर साल रिलेटेड पार्टीज - S P Finance and Trading Limited और Sanchna Trading and Finance Limited - से ले सकेगी। यह व्यवस्था फाइनेंशियल ईयर 2026-27 और 2027-28 के लिए है, और इस पर 12% प्रति वर्ष तक का ब्याज दर तय किया गया है, जो दोनों पक्षों की सहमति पर निर्भर करेगा।
यह कदम कंपनी के लिए काफी अहम है, क्योंकि Balkrishna Paper Mills पिछले कुछ समय से लगातार घाटे और नेगेटिव नेट वर्थ से जूझ रही है। मार्च 2025 तक कंपनी का नेट वर्थ ₹168.93 करोड़ के घाटे में था। ऑडिटर ने भी कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताई थी और अपनी रिपोर्ट में कुछ अहम सवाल उठाए थे। कंपनी का रेवेन्यू भी पिछले 5 सालों के निचले स्तर पर आ गया था।
कंपनी अपनी लिक्विडिटी (नकदी) को सुधारने के लिए अपनी अंबिवली फैक्ट्री की मशीनरी को ₹136.18 करोड़ में बेच भी रही है। यह बिक्री कंपनी की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
इन सब बदलावों के साथ, Balkrishna Paper Mills रियल एस्टेट सेक्टर से नई कमाई का जरिया तलाश रही है और इसके लिए अनसिक्योर्ड इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट का इस्तेमाल करेगी। हालांकि, कंपनी को अपनी वित्तीय अस्थिरता, रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन (जो कंपनी के सालाना टर्नओवर का 10% से ज़्यादा है) और रियल एस्टेट वेंचर की सफलता को लेकर कई जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
पेपर सेक्टर में Balkrishna Paper Mills के मुकाबले JK Paper Ltd., West Coast Paper Mills Ltd., Ballarpur Industries Limited और ITC Limited जैसे बड़े खिलाड़ी हैं, जो आमतौर पर पेपर मैन्युफैक्चरिंग पर ही फोकस करते हैं।
फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी का रेवेन्यू ₹2.41 करोड़ रहा, जबकि मार्च 2025 तक नेट वर्थ ₹168.93 करोड़ नेगेटिव था। Q3 FY26 के लिए ₹1.89 करोड़ का नेट लॉस भी दर्ज किया गया।
आगे चलकर देखना होगा कि कंपनी रियल एस्टेट वेंचर के लिए कितनी रकम निवेश करती है, बिज़नेस प्लान क्या है, और ICDs का इस्तेमाल कंपनी की माली हालत को कितना सुधार पाता है। साथ ही, पेपर बिज़नेस के नतीजे और मशीनरी की बिक्री की प्रगति पर भी नज़र रहेगी।